मानहानि मामले में पूर्व विधायक सिमरजीत बैंस को मिली एक साल की जेल, पटियाला कोर्ट का बड़ा फैसला; क्या था मामला?
लुधियाना के विधायक सिमरजीत सिंह बैंस को पटियाला कोर्ट ने मानहानि मामले में एक साल की कैद सुनाई है। यह ...और पढ़ें
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मानहानि मामले में पूर्व विधायक सिमरजीत बैंस को मिली एक साल की जेल। फाइल फोटो
HighLights
विधायक सिमरजीत बैंस को एक साल की कैद।
पूर्व मंत्री ब्रह्म मोहिंदरा ने दायर किया था केस।
दवा खरीद में अनियमितताओं के आरोप थे।
जागरण संवाददाता, पटियाला। पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री ब्रह्म मोहिंदरा की ओर से दायर मानहानि मामले में पटियाला की अदालत ने लुधियाना के विधायक सिमरजीत सिंह बैंस को एक साल की सजा सुनाई है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एकता सहोता की अदालत ने 19 अक्टूबर को भारतीय दंड संहिता की धारा 500 के तहत बैंस को दोषी ठहराते हुए यह फैसला सुनाया।
शिकायतकर्ता ब्रह्म मोहिंदरा की ओर से पेश हुए एडवोकेट गुरप्रीत सिंह भसीन ने बताया कि अदालत ने मानहानि के मामले में सिमरजीत बैंस को एक साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत के आदेश के अनुसार, दोषी पर जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर एक महीने के अतिरिक्त कारावास भुगतनी होगी।
सजा सुनाने से पहले अदालत ने दोषी सिमरजीत बैंस और उनके वकील की दलीलें सुनीं। बैंस ने नरमी बरतने की अपील करते हुए कहा कि वह लंबे समय से मुकदमे का सामना कर रहे हैं और अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य हैं। उन्होंने भविष्य में इस तरह का अपराध नहीं करने का भरोसा भी दिया।
कड़ी सजा देने की मांग
वहीं, शिकायतकर्ता पक्ष के वकील ने अपराध को गंभीर बताते हुए दोषी को कड़ी सजा देने की मांग की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और मामले के तथ्यों, अपराध की प्रकृति, दोषी की उम्र, पूर्व रिकार्ड तथा लंबे समय से मुकदमा चलने और परिवार की जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने एक साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
अदालत ने यह भी आदेश दिया कि दोषी पहले इस मामले में हिरासत में जितनी अवधि बिता चुका है, उसे सजा की अवधि में समायोजित किया जाएगा। फैसले की प्रति दोषी को निश्शुल्क देने और अपील या पुनरीक्षण की समयसीमा समाप्त होने तक पहले से दिए गए जमानत व मुचलका बांड बरकरार रखने के निर्देश भी दिए गए।
2018 में दायर हुई थी शिकायत
ब्रह्म मोहिंदरा ने सिमरजीत बैंस के खिलाफ एक अगस्त 2018 को मानहानि की शिकायत दायर की थी। शिकायत में उन्होंने अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा और राजनीतिक जीवन का उल्लेख किया था। ब्रह्म मोहिंदरा कई बार विधायक चुने गए और वर्ष 1992 से 1997 तक पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे।
मामले में शिकायतकर्ता की ओर से एडवोकेट गुरप्रीत सिंह भसीन और दोषी की ओर से एडवोकेट जगदीश शर्मा अदालत में पेश हुए।
ब्रह्म मोहिंदरा पर ये आरोप लगाए थे बैंस ने
वर्ष 2018 में तत्कालीन सेहत मंत्री ब्रह्म मोहिंदरा के खिलाफ विधायक सिमरजीत सिंह बैंस ने दवा खरीद में अनियमितताओं के आरोप लगाए थे।
बैंस के आरोप
- दवा कंपनी से संबंध: ब्रह्म मोहिंद्रा की एक दवा कंपनी में हिस्सेदारी होने का आरोप लगाया था।
- नशा छुड़ाओ केंद्रों पर दबाव: आरोप लगाया कि पंजाब के नशा छुड़ाओ केंद्रों को एक खास कंपनी से दवाएं खरीदने के लिए दबाव डाला जा रहा था।
- टेंडर में गड़बड़ी: बैंस ने आरोप लगाया कि दवा खरीद के टेंडर की शर्तें एक विशेष दवा कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए तैयार की गई थीं।
- सीबीआइ जांच की मांग: बैंस ने तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को पत्र लिखकर मामले की सीबीआइ जांच कराने की मांग की थी।
