चंडीगढ़ [कमल जोशी]। ग्रामीण क्षेत्रों में बेघर परिवारों को आवास उपलब्ध करवाने के लिए ग्रामीण शामलात भूमि से दिए जाने वाले 5 मरले के प्लॉट अब लाभपात्री परिवार के नाम पर ट्रांसफर नहीं किए जाएंगे। ग्रामीण परिवारों को आवास के लिए जमीन उपलब्ध करवाने की पंजाब सरकार की 2001 की नीति में बड़ा बदलाव करते हुए पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने अपने निर्देशों में कहा है कि शामलात भूमि में से गरीब परिवारों को दिए जाने वाले प्लॉट सिर्फ आवंटित किए जाएं, परंतु इन प्लॉटों को लाभपात्री गरीब परिवारों को ट्रांसफर न किया जाए।

गांवों में बेघर गरीबों को स्थायी आवास दिए जाने की व्यवस्था में एक चिर लंबित सुधार की दिशा दिखाते हुए जस्टिस रितु बाहरी की पीठ ने पंजाब सरकार को आदेश दिए हैं कि ग्राम पंचायतों के सरपंच गरीब परिवारों को पांच मरले के प्लॉट देने के लिए शामलात भूमि में से भूखंड को चिन्हित करें और लाभपात्री परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आर्थिक मदद से इन प्लॉटों पर अपने आवासों का निर्माण करें।

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि शामलात भूमि में से काटे जाने वाले इन प्लॉटों के लिए ग्राम पंचायतें नाममात्र का किराया भी वसूलें। अपने आदेशों में हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगर लाभपात्री मुफ्त में मिले प्लॉट पर सरकारी सहायता से बने मकान को छोड़ देता है तो ग्राम पंचायत इस मकान को किसी अन्य बेघर परिवार को बसा पाएगी।

बेघर परिवारों को प्लाट कब्जा देने के प्रस्ताव पर मांगा जवाब

हाई कोर्ट ने अपने आदेशों में पंजाब के साथ हरियाणा और चंडीगढ़ को भी बेघर परिवारों को प्लॉट पर मालिकाना हक देने के बजाय सिर्फ कब्जा देने के प्रस्ताव पर अपना जवाब अदालत में दायर करने के आदेश दिए हैं। हाई कोर्ट ने हरियाणा और चंडीगढ़ में अनुसूचित और गरीब परिवारों को प्लॉट आवंटित करने की नीति की अनुपालना पर जवाब देने के भी आदेश दिए हैं।

प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए पंजाब में 1.89 लाख लोगों ने किया आवेदन

पंजाब सरकार ने हाल ही में जारी किए गए आंकड़ों में कहा था कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास हासिल करने के लिए कुल 1.89 लाख लोगों ने आवेदन किया है।

मुफ्त प्लाट लेकर  बेचने व पंचायत की जमीन पर दोबारा कब्जे की मिलीं थी शिकायतें

पंजाब सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में बेघर परिवारों को आवास उपलब्ध करवाने के लिए 2001 में ऐसे परिवारों को शामलात जमीन में से 5 मरले के प्लॉट मुफ्त दिए जाने की नीति बनाई थी। इस नीति से अब तक सामने आए परिणामों पर टिप्पणी करते हुए हाई कोर्ट ने अपने आदेशों में कहा है कि इस नीति के तहत बेघर परिवारों के नाम पर प्लॉट ट्रांसफर किए जाने के चलते ऐसे बहुत से विवाद अदालतों में पहुंचे हैं, जहां लाभपात्रियों ने मुफ्त में मिले प्लाटों को बेच दिया और दोबारा गांव में ग्राम पंचायत की किसी खाली जगह पर कब्जा कर लिया गया।

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Posted By: Kamlesh Bhatt