संवाद सहयोगी, घरोटा: जिस प्रकार दीपक अंधकार का नाश करता है, वैसे विवेक व ज्ञान संपन्न महापुरुष अज्ञान रूपी अंधकार का नाश कर देते हैं। यह बात गांव पच्चोवाल में कथावाचक अशोक शास्त्री ने श्री लक्ष्मी नारायण पावन धाम में स्वामी रामानंद जी के नेतृत्व में आरंभ हुई श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिन कही। कथा पर संक्षेप में प्रकाश डालने के उपरांत उन्होंने भगवान श्री कृष्ण के जीवन की विभिन्न लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने गो माता के पूजन, तिलक, सूर्य उपासना, गीता पाठ के महत्व पर भी प्रकाश डाला और कहा कि जब संसार के प्रति वैराग्य हो जाता है, तब सत्यपुरुषों का सानिध्य प्राप्त होता है। भोगों की तृष्णा धीरे-धीरे नष्ट हो जाती है। शास्त्रों के वाक्य का यथार्थ बोध होता है। सत्य क्या है, मिथ्या, शास्वत, न‌र्श्वर, क्या है। यह बात ठीक से समझकर अपने जीवन में ढ़ाल ले। एक परमात्मा सत्य है। शेष सब तो कुछ भी पुत्र, परिवार, भवन, दुकान, मित्र, संबधी यह सब अनित्य है।

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