विनोद कुमार, पठानकोट : छह साल पहले निगम में शामिल हुए वार्ड नंबर 10 मामून के लोगों में निगम की कार्यप्रणाली को लेकर रोष बढ़ता जा रहा है। वार्डवासियों का आरोप है कि आए दिन निगम कभी प्रापर्टी टैक्स तो कभी कोई टैक्स जमा करवाने का आदेश जारी कर देता है। लेकिन, बदले में दी जाने वाली सीवरेज, स्ट्रीट लाइट व पानी की सुविधा पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। निगम यदि लोगों को सुविधाएं ही मुहैया नहीं करवा पा रहा तो फिर टैक्स किस बात का मांगा जा रहा है। लोगों को सुविधाएं मुहैया करवाए तो लोग भी खुशी से टैक्स जमा करवा देंगे। इसलिए, जब तक सुविधाएं नहीं तब तक निगम को टैक्स मांगने का भी कोई हक नहीं है। वार्डवासियों का कहना है कि निगम में शामिल होने के बजाय अपना गांव ही पसंद है।

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कूड़े के ढेर व खुले में बहता पानी करता है स्वागत

वार्डवासियों का कहना है कि शहरों में प्रवेश करने पर बेहतर गलियां, सीवरेज व स्ट्रीट लाइटे लोगों का स्वागत करती हैं, वहीं मामून में आने वालों का कूड़े के ढेर स्वागत करते हैं। सफाई का कोई उचित प्रबंध नहीं है। स्ट्रीट लाइट, पानी व सीवरेज की सुविधा अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। जबकि, निगम लोगों से टैक्स वसूल रहा है। निगम यदि लोगों से टैक्स वसूलना चाहता है तो उसके बदले में लोगों को सुविधाएं भी मुहैया करवाए न कि टैक्स लेने की बात दोहराता रहे।

वार्ड पर एक नजर

495 कुल घर

5100 के करीब आबादी

40 गलियां वार्ड में

30 के करीब गलियों में बिछी है सीवरेज लाइन।

2 ट्यूबवेल वार्ड में लोगों को पानी सप्लाई करने के लिए

4 मेन सड़कें

4 किलोमीटर के करीब वार्ड की परिधि।

निगम में शामिल होने से पहले ग्राम होता था मामून।

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लोगों ने रोया दुखड़ा गांव ही बेहतर था

वार्डवासी चिरंजी लाल का कहना है कि शहर का हिस्सा बनने के बाद लगा था कि अब बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। लेकिन, छह वर्ष बीतने के बाद भी उन्हें ऐसा कुछ नहीं लग रहा। इससे तो वह गांव में ही ठीक थे।

अब थोड़ा बहुत काम शुरू हुआ है

वार्डवासी नरेश कुमार ने कहा कि कहने को तो वह छह साल पहले ही शहरी एरिया में आ गए थे। लेकिन, इस दौरान कोई भी ऐसा कार्य नहीं हुआ जिसे देखकर वह अपने आप को शहरी आबादी वाला कह सकें। पिछले कुछ समय में थोड़े बहुत कार्य शुरू होने के बाद झलक दिखने लगी है। टैक्स देने से पहले सुविधाएं दें

वार्डवासी नीलम कुमारी का कहना है कि निगम आए दिन लोगों को कभी प्रापर्टी टैक्स तो कभी कोई टैक्स देने की बात तो करता है। लेकिन, सुविधाएं देने संबंधी कोई बात नहीं करता। टैक्स का मतलब तो यही होता है कि लोगों को सुविधाएं मुहैया करवाना जो अभी तक नहीं दिख रही।

अमृत योजना के तहत निगम में शामिल नए जुड़े एरिया में 87 करोड़ की लागत से वाटर सप्लाई व सीवरेज की नई लाइन बिछाने का काम चल रहा है। इसके तहत 140 किलोमीटर सीवरेज व 91 किलोमीटर वाटर सप्लाई की नई पाइप लाइन बिछाई जाएगी। कोरोना के चलते काम में करीब एक साल की देरी हो गई। बावजूद इसके अगले तीन से चार महीनों में सारा प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा।

-दिवितेश विरदी, एसडीओ, सीवरेज बोर्ड।

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