संवाद सहयोगी, सुजानपुर : श्री हरि पैलेस सुजानपुर में श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन  वाचक नदिया बिहारी दास जी ने समुद्र मंथन कार्य से विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि किस प्रकार देवताओं तथा असुरों द्वारा समुद्र मंथन कर कई रतन प्राप्त किए अमृत पान हुआ। विष को महादेव ने अपने कंठ में धारण किया, जिससे उनका कंठ नीला पड़ गया। विष को धारण करने वाले महादेव को इसलिए नीलकंठ भी कहा जाता है। इस मौके पर पार्षद अनुराधा बाली, अन्कि सेहदरा,  अंशु शर्मा,  नरेश महाजन, सुधीर महाजन संजू, रोमी, रूप लाल, श्याम तथा महिन्दर उपस्थित थे।

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