विनोद कुमार, पठानकोट

विधान सभा हो या लोक सभा चुनाव हर बार नैरोगेज रेलवे लाइन को शिफ्ट करने का मुद्द उठाता रहा है। चुनाव के समय नेता जनता से वादे तो करते हैं, लेकिन इसे पूरा नहीं करते।

नैरोगेज को पहले शहर के बाहर डल्हौजी रोड स्टेशन पर शिफ्ट करने का प्रपोजल आया। इसी में दो से तीन साल का समय बीत गया। इसके बाद एलीवेटिड की बात आई और फिर आरओबी को लेकर भी राजनीतिक पार्टियों ने अपनी वाह-वाही लूटी। लेकिन अभी तक किसी ने भी इसका समाधान नहीं करवाया है। चुनावी मौसम को देखते हुए पिछले महीने मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने भी इसे एलीवेटिड की मंजूरी मिलने की बात कही। अब चूंकि चुनाव आचार संहिता लग चुकी है जिस कारण नेता जनता के दरबार में जाकर उन्हें सेवा का मौका देने की बात कहते हुए इसका पहल के आधार पर हल करवाने की बात कह रहे हैं।

14 बार दो भागों में बंटता है शहर

शहर के बीचो-बीच से गुजरने वाली नैरोगेज रेल लाइन से ट्रेन गुजरने से पहले एक साथ सात फाटकों को दस मिनट पहले बंद कर दिया जाता है। चौबीस घंटे में ऐसा दस 14 बार होता है। इस हिसाब दिन में करीब चार घंटे तक ये फाटक बंद रहते हैं। रात के वक्त ट्रेनें गुजरने से तो जाम की स्थिति उतनी पैदा नहीं होती, लेकिन दोपहर के वक्त ट्रेनें गुजरते के दौरान फाटक बंद होने पर शहर दो भागों में बंट जाता है। सिर्फ एपीके रोड पर ही चार फाटक पड़ते हैं जोकि लाइट वाले चौक, काली माता मंदिर चौक, मिशन रोड चौक, अजय महाजन अस्पताल के पास और पुरानी कचहरी एपीके रोड पर स्थित है। जब भी ट्रेन गुजरती है तो इन फाटकों की वजह से पूरे रोड पर ट्रैफिक बढ़ जाता है। एलिवेटेड पर कांग्रेस-भाजपा में हुई थी क्रेडिट वार

जनवरी 2020 में भी नैरोगेज को एलिवेटेड में तबदील करने का मामला सुर्खियों में खूब आया था। उस समय भाजपा नेता जहां नैरोगेज को एलिवेटिड में तबदील करवाने का श्रेय सांसद सन्नी देओल को दे रहे थे, वहीं कांग्रेस के नेताओं ने इसका सारा श्रेय पूर्व सासंद सुनील जाखड़ व स्थानीय नेता को दिया था। कांग्रेस नेताओं ने कहा था कि भाजपाई उंगली पर लहू लगाकर 'शहीद' होने की बात कर रहे हैं जो शहरवासी जानते है। 164 किलोमीटर है जोगिंद्र नगर नैरोगेज रेल सेक्शन

पठानकोट-जोगिंद्र नगर सेक्शन के बीच लगभग 164 किलोमीटर लंबी नैरोगेज लाइन है। इस पर छोटी ट्रेनें चलती है। उक्त सेक्शन के बीच डलहौजी रोड है। वहां छह रेलवे क्रासिंग फाटक हैं। जब यहां से ट्रेन गुजरती है तो काफी देर तक रोड पर वाहनों का जाम लग जाता है। इस कारण लोगों को बहुत परेशानी उठानी पड़ती है। उक्त छह रेलवे क्रासिंग फाटक खत्म करने के लिए वर्ष 2016 में तत्कालीन सांसद विनोद खन्ना ने रेलवे बोर्ड के मेंबर इंजीनियर वीके गुप्ता के पास प्रस्ताव रखा था कि यहां पर एलिवेटेड लाइन (पिलरों के ऊपर) स्थापित की जाए ताकि रोड पर जाम न लगे।

230 करोड़ का है एलिवेटेड रेल लाइन का प्रोजेक्ट

रेल प्रशासन पठानकोट-जोगिदर नगर (नैरोगेज लाइन) रेल सेक्शन के बीच पड़ते डलहौजी रोड पर लगभग सवा चार किलोमीटर लंबी एलिवेटेड लाइन (पिलरों के ऊपर) का निर्माण करने जा रहा है। एलिवेटेड लाइन बनने के बाद पठानकोट रेलवे स्टेशन से डलहौजी रोड तक ट्रेन पिलरों पर चलेगी, उसके बाद यह जमीन पर बिछी रेल पटरी पर आ जाएगी। उक्त प्रोजेक्ट पर 230 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिसमें आधी राशि राज्य सरकार और आधी राशि रेल मंत्रालय वहन करेगा।

Edited By: Jagran