संवाद सहयोगी, पठानकोट : पठानकोट के मोहल्ला आनंदपुर रोड स्थित स्मार्ट प्राइमरी स्कूल में दिव्यांग बच्चों के लिए शिक्षा विभाग ने स्पेशल रिसोर्स सेंटर खोला है जो बच्चों की प्रतिभा को निखारकर आत्मनिर्भर बना रहे हैं। एक तरफ जहां अध्यापक मेहनत से दिव्यांग बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आजीविका कमाने के लिए जागरूक भी किया जा रहा है। इसके लिए वोकेशनल प्रोजेक्ट भी इस सेंटर में खोला गया है।

डीईओ प्राइमरी इंजीनियर संजीव गौतम ने बताया कि इस सेंटर में इस समय 72 बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहें है। यह बच्चे किसी न किसी शरीरिक या मानसिक विकार से ग्रस्त है। यह बच्चे यहां पर खेलने व पढ़ने के साथ साथ सॉफ्ट टॉय, जूट बैग, पैन, थ्री- डी टैक्नोलॉजी, बेसिक कम्प्यूटर एप्लीकेशन, ब्यूटी कल्चर, कटिग एवं ट्रेलरिग, फूड प्रोसैसिग, मोमबत्तियां, शगुन के लिफाफे बनाने की विधि सीखते हैं। बाजार में बेचा जाता है सामान

मासूमों की प्रतिभा पर आत्मनिर्भरता की छाप साफ नजर आती है। इनके हाथों टॉयाज, जूट बैग, पैन, थ्री-डी टैक्नोलॉजी से तैयार सामान, कटिग एंड टेलरिग का तैयार समान, मोमबत्तियां, पैन, शगुन के लिफाफे तथा साधारण लिफाफों को बाजार में बेचा जाता है तथा इस समान को बेचने से प्राप्त हुए पैसों को बच्चों की भलाई के लिए खर्चा जाता है। दिव्यांग बच्चों द्वारा बनाए गए सामान की प्रदर्शनी भी लगाई जाती है।

चार स्पेशल एजुकेटर तैनात

बच्चों की कार्य कुशलता देखते हुए अमेठी यूनिवर्सिटी द्वारा इन बच्चों को इस काबिल बनाने वाले चार स्पैशल एजुकेटरों की तैनाती की गई है जिसमें सविता, रीतू शर्मा, डॉ. मनदीप शर्मा व राकेश कुमार को बच्चों को पैरों पर खड़ा करने में सहयोग दे रहे हैं।

मोहल्लों में सर्वे कर बच्चों की पहचान की जाती है : डॉ. मनदीप शर्मा

जिला को-ऑडिनेटर वोकेशनल कोर्स डॉ. मनदीप शर्मा ने बताया कि वॉलंटियरों द्वारा मोहल्लों में सर्वे कर इस तरह के बच्चों की पहचान कर इन बच्चों को सेंटर में दाखिल करवाने के लिए माता पिता को प्रेरित करते है। विभाग द्वारा जिस बच्चे का सर्टिफिकेट नहीं बना होता उन बच्चों के सर्टिफिकेट बनवा कर उनकों सरकार की तरफ से मिलने वाली सारी सुविधाएं मुहैया करवाते है।

Posted By: Jagran

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