जागरण संवाददाता, पठानकोट: दशहरा पर्व से एक दिन पहले जिले में स्थित द हिदू कोआपरेटिव बैंक के 66 हजार खाताधारकों को आरबीआइ की ओर से तोहफा मिला है। आरबीआइ ने दशहरा से दो दिन पहले आर्डर जारी करके द हिदू कोआपरेटिव बैंक पर लगी सभी पाबंदियों को हटा दिया है। सोमवार से हिदू बैंक प्रबंधन अपने पुराने तरीके से काम करना शुरू करेगा। आरबीआइ के इस फैसले से अपने पैसों की निकासी को लेकर चितित उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। बैंक को पांव पर आने के लिए दो से तीन महीने का समय लग जाएगा, लेकिन उसके लिए प्रबंधन द्वारा योजना तैयार कर ली गई है। बैंक के दोबारा शुरू होने की जानकारी विधायक अमित विज ने वीरवार देर शाम बैंक के सीईओ, मेयर व शहर के विभिन्न वर्गो के प्रतिनिधियों के साथ एक मीटिग के दौरान उक्त जानकारी दी।

विधायक ने दावा करते हुए कहा कि बैंक बहुत ही नाजुक दौर से गुजरा है। इसलिए वह अब किसी भी कीमत पर दोबारा वह स्थिति नहीं बनने देंगे। अगले दो से तीन दिनों के भीतर यहां आगामी रणनीति तैयार की जाएगी, वहीं बैंक के संचालन को लेकर नए बोर्ड का भी गठन किया जाएगा, जिसमें राजनीतिक लोग नहीं शामिल होंगे।

80 करोड़ की हुई रिकवरी

विधायक अमित विज ने बताया कि बैंक 1925 में अस्तित्व में आया था। वर्तमान समय में बैंक के 66 हजार खाताधारक हैं। बदकिस्मती यह रही कि बदकिस्मती यह रही कि 2017 से पहले बैंक का संचालन कर रहे लोगों की गलत नीतियों के कारण 2019 में बैक घाटे की ओर चला गया। कारण, बैंक चलाने वाले प्रबंधनों ने नियमों को ताक पर रख कर अपने निजी स्वार्थ के लिए अपने चहेतों को करोड़ों रुपये के लोन जारी कर दिए, जो वापस न आने के कारण बैंक की आर्थिक स्थिति खराब हो गई। उपमुख्यमंत्री सुखजिद्र सिंह रंधावा तथा पंजाब सरकार द्वारा इसे दोबारा शुरू करने का सहयोग मिलने के बाद वर्तमान काम कर रहे अधिकारियों ने पिछले डेढ़ साल में 80 करोड़ की रिकवरी करके बैंक को दोबारा पांव पर खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि अभी भी कुछेक बकाया धारकों पर 47 करोड़ रुपये की बकाया राशि खड़ी है, जिसकी कानूनी प्रक्रिया चल रही है। बहुत जल्द उक्त रिकवरी भी हो जाएगी। 25 मार्च 2019 को आरबीआइ ने लगाई थी पाबंदी

डिफाल्टरों द्वारा बैंक को पैसे जमा न करवाने के कारण लगातार आर्थिक तौर पर बैंक की स्थिति खराब हो रही थी। बैंक के पास पैसों की लगातार कमी के चलते उपभोक्ताओं का भुगतान करना तक मुश्किल हो गया था। उपभोक्ता अपने पैसों की निकासी को लेकर प्रबंधन के पास जाने को मजबूर हो गए। धारकों को अपने ही पैसे निकलवाने के लिए सड़कों पर उतरना पड़ा। इसके बाद आरबीआइ ने 25 मार्च 2019 को बैंक पर पाबंदियां लगा दी थीं।

465 दिन से संघर्ष कर रहे हैं खाताधारक

अपने ही पैसे निकालने को लेकर उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सांसद, विधायक, डीसी सहित पंजाब सरकार के समक्ष खाताधारकों ने अपनी समस्या बताई परंतु कोई लाभ नहीं मिला। इसके बाद खाताधारकों ने संघर्ष समिति बनाई जो 465 दिनों से रोजाना बैंक कार्यालय के समक्ष धरने पर बैठ रहे हैं। खाताधारकों ने सांसद सन्नी देओल व विधायक अमित विज के निवास स्थान का भी घेराव किया। पाबंदियां हटने के बाद अब उन्हें अपने पैसे दोबारा मिलने की आस बन गई है। बैंक के सीईओ अमन मेहता का भी कहना है कि सभी धारकों के पैसे पूरी तरह से सुरक्षित है जो उन्हें देने के लिए प्रबंधन पूरी तरह से वचनबद्ध है।

बोर्ड में राजनीतिक लोगों को शामिल नहीं किया जाएगा : विधायक

विधायक अमित विज ने साफ शब्दों में कहा कि इससे पहले बनाए गए बोर्ड की गलत नीतियों के कारण ही बैंक की यह स्थिति हुई है, जिसे वह दोहराना नहीं चाहेंगे। उन्होंने कहा कि बोर्ड में राजनीतिक पहुंच रखने वाले लोगों को प्रतिनिधित्व मिला जिन्होंने उसका गलत इस्तेमाल कर बैंक को डूबोने का पूरा काम किया। उनकी गलत नीतियों के चलते ही शहर के 66 हजार धारकों को दो वर्षों तक परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन अब ऐसा किसी भी सूरत में नहीं होगा। नए गठित होने वाले बोर्ड में राजनीति से संबंधित किसी भी व्यक्ति को उसका हिस्सा नहीं बनाया जाएगा। कोशिश रहेगी कि उन गणमान्य लोगों को ही बोर्ड का सदस्य बनाया जाए जिन्हें आर्थिक नीतियों के बारे में जानकारी है ताकि बैंक को दोबारा पहले की भांति खड़ा किया जा सके।

24 को कोआपरेटिव बैंकों में डेपुटेशन पर भेजा गया

बैंक से पैसे का बोझ कम करने के लिए बैंक के 50 मुलाजिमों में से 24 को कोआपरेटिव बैंकों में डेपुटेशन पर भेजा गया है। हालांकि इस निर्णय पर काफी राजनीति हुई। बैंक प्रबंधन ने कुछ मुलाजिमों को डेपुटेशन पर भेजने की लिस्ट सरकार तथा चंडीगढ़ कोआपरेटिव सोसायटी के उच्चाधिकारियों को भेजी थी, ताकि बैंक पर इनके वेतन पर पड़ने वाले 2 करोड़ रुपये के प्रतिवर्ष के बोझ को कम किया जा सके। इसके बाद 91 कर्मचारी डेपूटेशन पर दूसरे बैंक में भेजकर घटा को कम किया गया। बैंक को नहीं मिल रहा था खरीदार

शुरुआत में बैंक को डिफाल्टरों की प्रापर्टी खरीदने के लिए कोई लोकल खरीदार नहीं मिल रहा था। इससे अधिकारी चितित थे। अधिकारी दूसरे जिलों में भी प्रापर्टी के खरीदार के लिए प्रचार करवा रहे थे। पहले आठ डिफाल्टरों की लिस्ट जारी की गई थी, जिसमें तीन डिफाल्टरो जेल भी भेजा गया।

26 मार्च-21 से प्रोग्रेस रिपोर्ट बेहतर

26 मार्च-21 को पहली बार आरबीआइ ने बैंक की बढि़या प्रोग्रेस रिपोर्ट को देखते हुए लेनेदेन पर रोक की अवधि को सिर्फ तीन माह के लिए 24 जून तक बढ़ाया है। हिदू बैंक की ओर से फरवरी-2021 में शुरू की गई ओटीएस स्कीम में 31 मार्च-21 तक 6.66 करोड़ रुपये की राशि एकत्र की जानी थी। प्रबंधन ने 47 डिफाल्टरों से 6.66 करोड़ रुपये एकत्र कर लिए और शेष राशि अप्रैल, मई व जून-21 में 16.92 करोड़ रुपये आ जाने की संभावना जताई थी। बता दें कि चुनौतियों के बावजूद हिदू बैंक का वित्तीय वर्ष में ग्रोस प्रोफिट 8.67 लाख रुपया हुआ। क्रेडिट वार की राजनीति

बैंक दोबारा शुरु होने का सारा श्रेय केंद्र सरकार को : पंकज

गुरदासपुर के सांसद सन्नी देओल के राजनीतिक सलाहार पंकज जोशी ने कहा कि बैंक को दोबारा शुरू करवाने का श्रेय केंद्र सरकार व सांसद को जाता है। सांसद सन्नी देओल ने समस्या को संसद में उठाने के साथ-साथ राज्य सरकार के समक्ष भी इसे प्रमुख्ता से उठाया। उनके द्वारा किए गए प्रयासों सदका ही आरबीआइ ने बैंक पर पैसों निकासी की रोक लगाने के फैसले को वापस लिया है। विधायक ने कसा तंज- लंदन में बैठकर मसले हल नहीं होते

विधायक अमित विज ने बैंक को दोबारा शुरू किए जाने पर सांसद व केंद्र सरकार के श्रेय वाली बात पर तंज कसते हुए कहा कि जब बैंक पर आरबीआइ ने पाबंदियां लगाई थी तो तब वह सांसद भी नहीं बने थे। विधानसभा में उस वक्त मसले को जोरदार तरीके से उन्होंने ने ही उठाया था। वह पिछले कई महीनों से लंदन में बैठे हैं। वहां बैठ कर मसले ही नहीं हुआ करते।

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