संस, पठानकोट : राज्य भर में हजारों बच्चे आंखों की कम रोशनी के कारण परेशान हैं। पठानकोट जिला की बात की जाए तो यहां भी सैकडों बच्चे आंखों की कम रौशनी से पीड़ित हैं। परन्तु अब इन कम रोशनी वाले बच्चों को घबराने या परेशान होने की जरूरत नही है। जिला के हरेक पीड़ित बच्चे को इस समस्या से निजात दिलवाई जाएगी। यही नही आंकड़ों के हिसाब से पठानकोट जिला पंजाब का सबसे पहला जिला होगा जो आंकडों सहित पीड़ित लोगों का उपचार कर उन्हें राहत दिलवाएगा। यह बात वीरवार को सिविल सर्जन डाक्टर नैना सलाथिया ने दैनिक जागरण से विशेष बातचीत दौरान कही। उन्होंने बताया कि जिला सेहत विभाग द्वारा नेशनल प्रोग्राम फॉर कंट्रोल ऑफ ब्लाइंडनेस के तहत 31 मार्च 2019 तक जिला के स्कूलों,आंगनबाड़ी सेंटरों के करीब बयासी हजार सात सौ बारह (82712) बच्चे कवर करने का लक्ष्य है। इनमें स्कूलों के 56336 बच्चे तथा आंगनबाड़ी के 26376 बच्चे शामिल हैं। उन्होंने बताया कि अब तक 51989 बच्चों का चेकअप हो चुका है। इनमें 912 बच्चों की नजर कमजोर पाई गई। जिन्हें सेहत विभाग की ओर से नि:शुल्क चेकअप के अतिरिक्त निशुल्क चश्मे दिए गए हैं। यही नही स्कूली बच्चों की आंखों की स्क्री¨नग के दौरान जिन बच्चों में आंखों की कमजोरी पाई जाती है उनका सरकार की ओर से मुफ्त इलाज किया जाने के अतिरिक्त उन्हें स्कूल से अस्पताल तथा वापस स्कूल तक छोड़ने का काम विभाग की गाड़ियों द्वारा किया जा रहा है। ताकि बच्चों की पढ़ाई में कोई परेशानी पेश न आए।

अधिकतर बच्चों की नजर कमजोर होने के कारण संबंधी सिविल के आंखों के विशेषज्ञ डाक्टर रमेश डोगरा ने बताया कि टेलीविजन ,वीडियो गेम, कंप्यूटर तथा मोबाइल,फास्ट फूड का अधिक इस्तेमाल,पीने वाले साफ पानी का कम इस्तेमाल होने से परेशानियां बढ़ रही हैं। इनके इस्तेमाल से आंखों की रोशनी पर बहुत बुरा असर पड़ता है तथा कक्षा में पढ़ते समय बहुत दिक्कत पेश आती है। उन्होंने कहा कि जिन बच्चों में विटामिन ए के कारण नजर कमजोर पाई जाती है उनके पेरेंट्स अपने बच्चों को हर रोज ताजा गाजर का जूस पिलाएं । आंखों की नजर संबंधी उन्होंने अन्य सुझाव देते हुए बताया कि आंखों को हर रोज दो-तीन बार साफ पानी से जरूर धोएं ,धूल ,मिट्टी ,सूरज की तेज किरणों से बचा कर रखें । मोबाइल व कंप्यूटर की स्क्रीन की रोशनी को कम रखें तथा लगातार काम करते समय आंखों को थोड़ा थोड़ा विश्राम भी दें । उन्होंने बताया कि यदि कोई बच्चा अपनी आंखों को बार-बार मसलता है, टीबी देखते हुए या पढ़ते समय सिर दर्द की शिकायत करें तो यह कमजोर नजर होने की निशानी है । इसी तरह यदि बच्चा एक आंख बंद करके टीबी जा वीडियो गेम खेलें तो समझें कि उसे चश्मा लगने वाला है।

45 से अधिक उम्र के लोग भी नि:शुल्क करवाएं उपचार

सिविल सर्जन डॉ. नैना सलाथिया ने बताया कि स्कूली बच्चों की भांति नेशनल प्रोग्राम आफ कंट्रोल ब्लाइंडनेस (एनपीसी) के तहत जिला के 45 से अधिक उम्र के लोगों की नि:शुल्क आंखों का चेकअप होगा। जिन लोगों की आंखें कमजोर होंगी उन्हें नम्बर के चश्मे विभाग की ओर से निशुल्क दिए जाएंगे। इस सुविधा को प्राप्त करने के लिए अपनी आंखों का चेकअप करवाने वाला हरेक व्यक्ति अपनी एक पासपोर्ट साइज की फोटो व आधार कार्ड की कापी लेकर आए। यह सुविधा आज शुक्रवार से ही शुरू कर दी गई है।

Posted By: Jagran

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