संवाद सहयोगी, पठानकोट। सिविल अस्पताल एक बार फिर सुर्खियों में है। अस्पताल स्टाफ ने मंगलवार रात डिलिवरी के लिए अस्पताल में भर्ती होने आई महिला को भर्ती करने व डिलिवरी करवाने से मना कर दिया। अस्पताल प्रशासन की ओर से महिला को अमृतसर भी रेफर कर दिया गया था, लेकिन इसी दौरान पीड़ित महिला की लेबर रूम के बाहर ही डिलिवरी हो गई। उसके पति जंग बहादुर निवासी पिपलांवाला मोहल्ला ने सिविल अस्पताल के स्टाफ पर आरोप लगाते हुए बताया कि मंगलवार रात उसकी पत्नी को लेबर पेन होने के कारण 108 एंबुलेंस से अस्पताल लाया गया, लेकिन स्टाफ द्वारा उसकी पत्नी को भर्ती न करके अमृतसर अस्पताल में रेफर कर दिया गया था।

जंग बहादुर ने बताया कि उसने स्टाफ से कहा भी था कि वह पत्नी को अमृतसर लेकर जाने में सक्षम नहीं है। इसलिए पत्नी का इलाज सिविल अस्पताल में ही किया जाए। पति ने आरोप लगाया कि स्टाफ द्वारा उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया व पुलिस को शिकायत देने की धमकी भी दी गई। जंगबहादुर ने बताया कि स्टाफ की ओर से महिला को भर्ती करने से मना करने के बाद उसकी पत्नी ने लेबर रूम के बाहर ही रात के करीब दो बजे बच्चे को जन्म दिया। महिला के पति ने बताया कि अब जच्चा-बच्चा दोनों ठीक है ।

पहले भी आए हैं ऐसे मामले

बता दें कि सिविल अस्पताल में रात के समय गर्भवती को भर्ती न करने के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। बीते कुछ दिन पहले भी घरोटा निवासी रमन कुमार की पत्नी को डिलीवरी के समय अस्पताल में भर्ती न करके रेफर कर दिया गया था। उस समय अस्पताल में रात के समय डाक्टर मौजूद न होने का तर्क देकर कहीं और जाने को कहा गया था। महिला के परिजनों द्वारा महिला को निजी अस्पताल में ले जाया गया था। वहां उसका सिजेरियन हुआ था।

महिला का कोई टेस्ट या अल्ट्रासाउंड नहीं करवाया गया थाः एसएमओ

इस संबंध में कार्यकारी एसएमओ डा. सुनील चंद का कहना है कि डिलवरी के लिए आई महिला की पांचवीं डिलवरी थी। महिला की ओर से किसी तरह की कोई टेस्ट या अल्ट्रासाउंड नहीं करवाए गए थे। स्टाफ की ओर से महिला के पति को गर्भवती के टेस्ट करवाने के लिए कहा गया था। इसी दौरान महिला की लेबर रूम के बाहर ही डिलिवरी हो गई।

Edited By: Vinod kumar

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