राज चौधरी, पठानकोट

पंजाब के लोगों को अब हनीमून मनाने या घूमने के लिए मालदीव या अंडमान नहीं जाना पड़ेगा। तीन राज्यों के संगम स्थल पठानकोट में टापुओं का अहसास दिलाने के लिए पंजाब सरकार ने योजना बनाई है। यहा की रणजीत सागर झील के कुलारा व मुशरवा टापू को अब टूरिस्ट हब के रूप में विकसित किया जाएगा। इसका जिम्मा पंजाब इंफ्रास्ट्रेक्चर डेवलपमेंट बोर्ड को प्रोजेक्ट सौंपा गया है। बीते दिनों बोर्ड के अधिकारियों की वन विभाग से हुई बैठक में झील के 30 हेक्टेयर रकबे को टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनाने पर सहमति बनी है। दो सौ करोड़ रुपये से यहां पर कई तरह के होटल, ईको रिजॉर्ट, रिहायशी कॉलोनी व पार्किंग बनाई जाएगी। निर्माण दो पॉकेट में होगा। पहले में 5 लग्जरी विला विद जैटी, कारपोरेट कन्वेंशन सेंटर, 200 कमरों के साथ अटैच गोल्फ कोर्स बनाए जाने की योजना है। दूसरी पॉकेट में 200 कमरे और 50 विला वाला स्पा रिजॉर्ट रेस्तरां, कैफे व तमाम मूलभूत सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा। योजना के तहत 96 फीसदी वन भूमि इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए प्रस्तावित की गई है।

पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर बादल ने देखा था सपना

पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने इस ड्रीम प्रोजेक्ट को पांच साल पहले तैयार किया था। तब इस पर 1000 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना थी। विधानसभा चुनाव से पहले शिवालिक धौलाधार टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड ने इस प्रोजेक्ट पर मोहर लगाकर मंजूरी के लिए वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेजा तो इसे रिजेक्ट कर दिया गया। इंस्पेक्शन रिपोर्ट में कहा गया कि योजना महज दिखावा मात्र इको टूरिज्म है। असल में इस प्रोजेक्ट में बड़े निर्माण कार्य प्रस्तावित किए गए हैं। प्रोजेक्ट सीधे तौर पर डैम के कैचमेंट एरिया और इको सिस्टम को प्रभावित कर सकता है।

इसी महीने टीम करेगी दौरा

डीएफओ डॉ. संजीव तिवारी ने प्रोजेक्ट के जल्द शुरू होने की उम्मीद जताई। कहा, पहले 123 हेक्टेयर रकबा लिया जाना था। पर अब सिर्फ 30 हेक्टेयर ही कवर होगा। प्रोजेक्ट को अंतिम रूप देने के लिए पीआईडी बोर्ड की टीम इसी माह आरएसडी बांध परियोजना का दौरा करेगी।

11010 पेड़ व 3541 बांस काटने की स्थिति स्पष्ट नहीं

पुराने प्रोजेक्ट की जांच करने पर अधिकारियों ने पाया था कि जिस जगह को टूरिज्म के लिए विकसित किया जाना है। वहां 11010 पेड़ व 3541 के करीब बांस लगे हैं। प्रोजेक्ट में यह स्पष्ट नहीं था कि इसमें से कितने पेड़ व बांस काटे जाएंगे। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यदि इतनी बड़ी मात्रा में पेड़ कटते हैं तो कैचमेंट एरिया में बहने वाले जलाशय में गाद की समस्या पैदा हो सकती है। अब टापू तक पहुंचने के लिए गाव पलंगी से 3000 के करीब पेड़ व 1800 के लगभग बास काटे जाएंगे। मुशरवा टापू के पेड़ काटने का सर्वेक्षण अभी चल रहा है।

तीन तरफ पानी, एक तरफ सड़क

कुलारा टापू तक पहुंचने के लिए एकमात्र रास्ता गाव पलंगी है। बाकी तीनों दिशाएं पानी से घिरी हैं। टूरिस्ट प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाने के लिए इस मार्ग को खास तौर पर विकसित किया जा सकता है। मुशरवा टापू को जाने के लिए कोई रास्ता नहीं है। टापू चारों तरफ से पानी से घिरा हुआ है। सैलानियों को यहां पहुंचाने के लिए स्पेशल बोट अथवा क्रूज का सहारा भी लिया जा सकता है। डीएफओ डॉ. संजीव तिवारी के अनुसार दोनों टापुओं को आपस में जोड़ने के लिए अस्थायी पुल के निर्माण पर मोहर लग सकती है। इस प्रोजेक्ट को पूरा होने में करीब दो साल का समय लग सकता है।

Posted By: Jagran