पठानकोट [श्याम लाल]। पाकिसतानी आतंकियों द्वारा पठानकोट एयरबेस स्टेशन पर 2 जनवरी की सुबह किए गए हमले के सबूतों को झुठलाना पाकिस्तान की ज्वाइंट इंवेस्टीगेशन टीम (जेआइटी) के लिए मुश्किल होगा। इस हमले की जांच भारत की नेशनल इंवेस्टीगेशन एजेंसी (एनआइए) ने लगभग पूरी कर ली है। जांच में एनआइए ने हमले से जुड़े सभी सबूतों को इस प्रकार एकत्र किया है कि सभी कडिय़ां आपस में जुड़ रही हैं।

मंगलवार को पठानकोट आ सकता है पाक का जांच दल

पाकिस्तान की जेआइए भारत के दावे को प्रथम दृष्टया सही मानते हुए मामले में एफआइआर दर्ज कर जहां जांच कर रही है, वहीं उसका पांच सदस्यीय जांच दल इसी सिलसिले में भारत पहुंच चुका है। माना जा रहा है कि जांच दल पठानकोट मंगलवार को आएगा और जरूरत पड़ी तो यह दल एक दिन के लिए यहां ठहरेगा भी।

एयरबेस से पाकिस्तान किए गए फोन कॉल बनेंगी पुख्ता सबूत

सूत्र बताते हैं कि जिस प्रकार भारत ने सारा केस तैयार किया है उसके पहलुओं को देखते हुए पाक की जांच टीम के पास 2 जनवरी की सुबह एयरबेस पर हमला करने वाले आतंकियों के पाक कनेक्शन को झुठलाना मुश्किल हो जाएगा।

भारत ने अपनी जांच में उन मोबाइल कॉल्स को भी आधार बनाया है जिन्हें आतंकवादियों ने एयरबेस के भीतर घुसने के बाद पाकिस्तान में अपने घर व हैंडलर्स को किया था। तकनीक के इस जमाने में यह मोबाइल कॉल इस बात का प्रमाण हैं कि उनकी आउटगोइंग कॉल का विवरण जहां पठानकोट एयरबेस परिसर का है वहीं इनकमिंग कॉल पाकिस्तान में रिसीव हो रही है।

इसके अतिरिक्त बातचीत का सारा ब्यौरा और व्वायस रिकार्ड भी इस बात का प्रमाण रहेंगे कि आतंकी पाकिस्तान के नागरिक रहे हैं और उन्हें इस नापाक मिशन पर वहीं से भेजा गया था। समझा जा रहा है कि भारत सरकार पठानकोट पहुंच रही पाक की जांच टीम की मांग पर चश्मदीदों से भी मिलाने में कोई गुरेज नहीं करेगीे।

इन चश्मदीदों में पंजाब पुलिस के एसपी सलविंदर सिंह के अलावा उनके कुक मदनलाल व ज्वेलर दोस्त राजेश वर्मा शामिल हैं। ये सभी ऐसे चश्मदीद हैं जो आतंकियों को अच्छी तरह से पहचानते हैं और उनके पाकिस्तान से भारत में घुसने व एयरबेस तक पहुंचने के साक्षी हैं।

क्या करेगी पाक जांच टीम

पठानकोट पहुंच कर पाक की जांच टीम एयरबेस के उस प्वाइंट का दौरा करेगी जहां आतंकियों के साथ लंबी मुठभेड़ हुई थी। वहीं वह आतंकियों के एयरबेस के भीतर घुसने के रास्ते का भी निरीक्षण कर सकती है। इसके अतिरिक्त उस प्वाइंट का भी निरीक्षण कर सकती है जिस प्वाइंट से एसपी सलविंदर सिंह की गाड़ी पर कब्जा किया गया था और एयरबेस स्टेशन के बैक साइड तक उसका सहारा लिया गया था।

भारत ने कूटनीति के तहत आतंक को नकेल डालने के लिए पाकिस्तान को जहां इस जांच में पूरा सहयोग देने का मन बना लिया है, वहीं वह इस बात का भी पूरा ध्यान रख रहा है कि जांच दल आतंकी हमले की जांच के सिवाय कहीं आसपास ताक-झांक नहीं कर पाए।

भारत के स्टैैंड से आतंकी संगठन सकते में

आतंक के खिलाफ पाकिस्तान को मजबूत स्टैंड रखने के लिए मजबूर कर देने वाले भारत के रवैये ने पाकिस्तान में बैठे आतंकी संगठनों को सकते में डाल दिया है। उन्हें यह कतई गवारा नहीं है कि भारत और पाक आतंकवादियों की किसी कार्रवाई के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई करें। सूत्र बताते हैं कि इस जांच से खफा आतंकी दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए कोई नया हथकंडा भी अपना सकते हैं। हालांकि भारत इस तरह की आशंका के मद्देनजर पहले ही सतर्क है।
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पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमला : घटनाक्रम
- 31 दिसंबर, 2015 की सायं पाकिस्तान के चार प्रशिक्षित आतंकवादी भारत में घुसे और उन्होंने बमियाल सेक्टर में टैक्सी ड्राइवर इकागर सिंह की हत्या करउसकी इनोवा गाड़ी को वहीं पर छोड़ दिया। इसके बाद एसपी सलविंदर सिंह व उनके दो साथियों को किडनैप करते हुए उनकी गाड़ी को कब्जे में ले लिया था।
-आतंकी इसी गाड़ी के सहारे बमियाल सेक्टर से एयरफोर्स स्टेशन के पिछले हिस्से की दीवार तक पहुंचे और एयरबेस के एमईएस बिल्डिंग में घुस गए।
- पहली जनवरी को वह दिन भर एयरबेस स्टेशन के भीतर ही रहे। इसकी भनक सुरक्षा एजेंसियों और एयरफोर्स को लग चुकी थी। आतंकियों को घेर लिया गया परंतु उनके हमले की प्रतीक्षा की गई।

- 2 जनवरी की सुबह तीन बजे चारों आतंकवादियों ने एमईएस बिल्डिंग के पास बनी मैस में टैक कर डीएससी के चार जवानों को शहीद कर दिया। इस मौके पर एक जवान ने भी खाली हाथ होने के बावजूद एक आतंकी को ढेर कर दिया।
- 3 जनवरी की सायं तक चले इस आपरेशन में यूं तो चारों आतंकवादी मार दिए गए परंतु अगले दिन जब आपरेशन सर्च शुरू हुआ तो पहले से छिपे बैठे दो अन्य आतंकवादियों ने हमला बोल दिया।
- सेना, एनएसजी ने एमईएस बिल्डिंग में छिपे बैठे इन दोनों आतंकवादियों को विस्फोट करके उड़ा दिया। इन दो आतंकियों में से एक का शव 4 जनवरी को मिला वहीं छठे का क्षत-विक्षत शव 6 जनवरी को मिला।

- आतंकियों ने एयरफोर्स कैंपस के भीतर बड़ी मात्रा में गोला-बारुद बिछा रखा था। इसको हटाने के लिए तथा एयरफोर्स परिसर का चप्पा-चप्पा छानने के लिए आपरेशन कांबिंग कई दिन तक चला।
- भारत सरकार ने आतंकी हमले की जांच एनआइए को सौंपी और एनआइए के आईजी एसके ङ्क्षसह को पठानकोट भेज दिया गया। वह करीब दो महीने यहां रुके और अब उनकी देख-रेख में जांच जारी है।
- एनआइए ने आतंकी हमले से दो महीने पहले से लेकर आज तक ऐसे हजारों फोन कॉल, एसएमएस व इंटरनेट कॉल को खंगाला जिनके जरिए पाकिस्तान में बातचीत की गई थी।

Posted By: Sunil Kumar Jha

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