संवाद सहयोगी, जुगियाल : गांव डूंग के प्राचीन मुक्तेश्वर धाम में साल 2021 में 25 लाख से ज्यादा लोग नतमस्तक हुए। जय भोले मुक्तेश्वर धाम प्रबंधक कमेटी के चेयरमैन भीम सिंह बताया कि धाम पर सोमवती अमावस्या, महाशिवरात्रि, विक्रम संवत, वैशाखी सहित अन्य कई पर्वो पर बड़ी संख्या में लोग आते हैं। वहीं चैत मास की अमावस्या के एक दिन पहले और एक दिन बाद हर साल मेला लगता है। इसमें पंजाब, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली व महाकाल की धरती उज्जैन से श्रद्धालु आकर रौनक को बढ़ाते हैं।

यह धाम लगभग 6600 वर्ष पुराना है। इसका इतिहास महाभारत के काल से जुड़ा हुआ है। महाभारत के समय पांडवों द्वारा अपना एक वर्ष का अज्ञातवास काटने के लिए इसी स्थान को चुना गया था। पहाड़ियों का सीना चीर कर रावी दरिया किनारे पांडवों ने पांच गुफाएं, रसोईघर, धर्मराज का थड़ा व भगवान भोलेनाथ का एक मंदिर बनाया था। यहां पांडवों ने महाभारत युद्ध में जीत दर्ज करने के लिए कठिन तपस्या की। पांडवों की इस तपस्या से खुश होकर भगवान भोलेनाथ ने इस स्थान पर स्वयं प्रकट होकर पांडवों को विजयश्री का आशीर्वाद दिया था। इसी के साथ रवि दरिया के दूसरी तरफ एक बड़ी हिडिबा गुफा भी बनाई थी और वहीं पर भीम द्वारा एक कोहलू भी लगाया गया था। एक बार जब कोहलू से तेल नहीं निकला तो भीम ने कोहलू को उखाड़ कर दूर फेंक दिया, जो इस स्थान से लगभग पांच किलोमीटर दूर जम्मू क्षेत्र के एक गांव में गिरा। जिस स्थान पर आज भी चैत्र मास की अमावस्या को भारी मेला लगता है। इस स्थान पर कई बड़े नेता, बड़े अधिकारी और सुप्रीम कोर्ट के कई न्यायधीश भी नतमस्तक हो चुके हैं और भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त कर चुके हैं।

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