संवाद सहयोगी, माधोपुर : सरकार साडी जमीन कखां च खरीद के लक्खां च बेच रही है। यह कहना है आइजीसी यानी इंडस्ट्रियल ग्रोथ सेंटर के भूमि अधिग्रहण में जमीन देने वाले किसानों का। इंडस्ट्री के लिए पंजाब सरकार द्वारा किए भूमि अधिग्रहण को लेकर गांव रानीपुर के किसानों ने रोष जताया है। गुस्साए किसानों का आरोप है कि पंजाब सरकार उनकी जमीन सस्ते दामों पर खरीदकर अब महंगे भाव पर बेच रही है। जिससे किसान सरकार के हाथों ठगा सा महसूस कर रहे हैं। किसान हरदीप रिका, इकबाल सिंह, पलविद्र संधू, गुरिद्र सिंह ने बताया कि सरकार ने गांव अखवाना में इंडस्ट्रियल ग्रोथ सेंटर के लिए वर्ष 1992 में 413 एकड़ जमीन एक्वायर की थी। तब किसानों को इसके एवज में महज 30 या 40 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से दिए गए, जो काफी कम थे। अब सरकार इसी जमीन को 50 हजार प्रति मरला के हिसाब से बेच रही है, यानी भूमि अधिग्रहण की दोहरी नीति के चलते किसानों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अन्नदाता के साथ हमेशा से ही सरकार का रवैया ठीक नहीं रहा है, विकास कार्यो के नाम पर उनसे जमीन हड़प ली जाती है और अब रोजगार देने और इंडस्ट्री लगाने के नाम पर अधिग्रहित की जाने वाली जमीन में भी भेदभाव किया जा रहा है।

मांग को अनदेखा किया तो करेंगे संघर्ष

पांच साल पहले केंद्र सरकार ने किसानों की भूमि अधिग्रहण करने के लिए नई नीति बनाई थी जिसके तहत किसान की जमीन 4 लाख रुपये प्रति एकड़ से कम में अधिग्रहित नहीं की जाएगी। उसके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी अथवा उस क्षेत्र में स्थापित होने वाली फैक्ट्री, कारखाने आदि में रोजगार देने का भी नियम बनाया है। किसानों ने पंजाब सरकार से नए नियमों के तहत मुआवजा देने की मांग की और यदि ऐसा नहीं होता है तो सभी किसान संघर्ष करने पर मजबूर होंगे।

Posted By: Jagran

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