संवाद सहयोगी, डमटाल : स्वयं भू-प्रकट आद शिवलिग प्राचीन एवं एतिहासिक शिव मंदिर काठगढ़ में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। प्रभु प्रेमियों ने कड़कती गर्मी में भी बम-बम भोले एवं हर-हर महादेव के जयघोष लगाते हुए घंटों तक लंबी लाइनों में लगे रहे। इसके बाद स्वयं भू-प्रगट शिवलिग के दर्शन करने के बाद शिवलिग पर जलाभिषेक, फूल मालाएं आदि चढ़ाकर नतमस्तक हुए। श्री मद्भगवतकथा महान कथावाचक जोगेंद्र पाल शास्त्री ने कहा कि समदर्शी इंसान ही समाज का भला कर सकता है। ऋषिदेव महाराज ने खुद के बजाए अपने बड़े बेटे भरत को राजपाठ दे दिया क्योंकि उनका मानना था कि राम नाम मे ही सुख है न कि राजपाठ में। उन्होंने यह भी कहा कि नर्मदा नदी की प्रत्येक कंकर भगवान के वरदान के कारण शिवलिग के रूप में माना जाता है और कीर्तन व सत्संग में दोनो हाथों से ताली बजाने से हाथ की लकीरें बदल जाती है व दरिद्रता खत्म हो जाती है। अंत में महिमा को सुनने के लिए आए हुए श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।

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Posted By: Jagran

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