संवाद सहयोगी, पठानकोट : आर्ट ऑफ लिविग संस्था शाखा पठानकोट ने सत्संग संध्या कार्यक्रम का आयोजन स्थानीय होटल में करवाया। इस कार्यक्रम में क्षेत्र के प्रतिष्ठित उद्योगपतियों, सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों और क्षेत्रवासियों ने भाग लिया। विशेष तौर पर पहुंचे विश्व विख्यात गायक व वरिष्ठ शिक्षक ऋषि नित्य प्रज्ञा ने अपने भजनों व ज्ञान चर्चा से साधकों को प्रेरित किया। ऋषि नित्य प्रज्ञा ने बताया कि 30 करोड़ लोग सुदर्शन क्रिया को अपनाकर तनाव मुक्त जीवन जीने की कला सीख रहे हैं। उन्होंने 27 फरवरी से 1 मार्च तक चलने वाले हैप्पीनैस प्रोग्राम में भाग लेकर सुदर्शन क्रिया सीखने की अपील की।

इस अवसर पर ऑर्ट ऑफ लिविग के शिक्षक डॉक्टर पुनीत शर्मा, प्रशांत मित्तल, अभिनव महाजन, दीपक शर्मा, डॉ.पंकज, संगीता आनंद, अनिल अनेजा, करुपाली,आकाश, यतिन, नीलम और वरिष्ठ सदस्य पंकज मल्होत्रा, मोनिका मल्होत्रा, मोनिका मेहता, अश्विनी महाजन, श्वेता, शिभम, शशांक, जस्सी, मंजुला, लीना ने लोगों का आभार व्यक्त किया।

पूर्व मंत्री मास्टर मोहन लाल, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अश्विनी शर्मा, मेयर अनिल वासुदेवा, प्रसिद्ध उद्योगपति जगत अग्रवाल, सतीश महेन्द्रू, नरेन्द्र काला, पूर्व मंत्री रमण भल्ला, अनु भल्ला, रेवा शर्मा, डॉ. प्रगति शर्मा, वंतिका मित्तल, विपिन महाजन, संजीव महाजन, जिला प्लानिग बोर्ड के चेयरमैन अनिल दारा, एडवोकेट रमण पुरी, प्रिसीपल डॉ.दिनेश शर्मा, समरेन्द्र शर्मा, श्री कृष्ण कृपा परिवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ.सुदर्शन अग्रवाल, बिट्टू अग्रवाल, बांका बहादुर, आर.एस.एस के सहसंघ चालक अशोक महाजन,प्रसिद्घ उद्योगपति संदीप मित्तल, मिनाल मित्तल के अतिरिक्त क्षेत्र के गणमान्य आदि उपस्थित थे।

लक्ष्य की खोज के दौरान हुई थी श्री श्री रविशंकर से मुलाकात-ऋषि नित्य प्रज्ञा

मिशन रोड पर स्थित प्रसिद्ध उद्योगपति इंद्रसेन मित्तल और रवीश मित्तल के निवास स्थान पर सुबह कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें ऋषि नित्य प्रज्ञा ने ऑर्ट ऑफ लिविग से जुड़ने और लोगों को तनाव मुक्त रहने की कला के बारे में जागरूक करने की अपनी कहानी सुनाई। उन्होंने कहा कि जीवन के लक्ष्य की खोज के दौरान उनकी मुलाकात ऑर्ट ऑफ लिविग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर जी से हुई और तभी से वह ऑर्ट ऑफ लिविग से जुड़ गए। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के जीवन में यह क्षण आता है कि जब आत्म चेतना जगती है और यह महसूस होता है कि जीवन का असली सुख भौतिक चीजों के अलावा भीतर की दुनिया में है और खुशी हमेशा बांटने से ही बढ़ती है।

Posted By: Jagran

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