संवाद सहयोगी, पठानकोट : प्रशासन हर साल सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाकर लोगों को जागरूक करता है। मगर संसाधनों की कमी के कारण जिला परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस सिर्फ कागजी कार्रवाई ही पूरा कर रही है। पर्याप्त मात्रा में कर्मचारियों की कमी तो है ही साथ ही शहर की सड़कों पर जर्जर हालत वाहन धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं। इसकी मिसाल पठानकोट से चक्की और सुजानपुर तक बड़ी संख्या में अपनी मियाद पूरी कर चुके थ्री व्हीलर हैं।

लगभग पांच साल पहले तत्कालीन निगम के पहले ज्वाइंट कमिश्नर जेपी सिंह ने शहर में चल रहे टेंपुओं को हटाने का आदेश जारी किया था। मगर बदकिस्मती से वह सस्पेंड हो गए तथा ये मुहिम बीच अधर में ही लटक गई।

इसके बाद जिला परिवहन विभाग की जिम्मेवारी है कि वह मियाद पूरी कर चुके वाहनों को तुरंत बंद करवाए। मगर जिला में स्थायी तौर पर कोई मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर नहीं है। जिस मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर की पठानकोट में तैनाती की गई है, उनके पास तरनतारन का चार्ज है। सप्ताह में सिर्फ एक-दो दिन ही पठानकोट ऐसे वाहनों की जांच करने से ही समस्या हल नहीं हो सकती।

संसाधनों की कमी भी हादसों पर नियंत्रण में बड़ा रोड़ा

संसाधनों और पुलिस कर्मचारियों की कमी के कारण हादसों को नियंत्रित करना पुलिस के बस की बात नहीं। जिला की ट्रैफिक व्यवस्था भी बुरी तरह चरमरा चुकी है। ट्रैफिक पुलिस कर्मचारियों की ड्यटी दिनभर चौंक-चौराहों में लगी रहती है। सड़कों पर दौड़ने वाले इन जर्जर हालत वाहनों पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा। कभी कभार यदि ऐसे वाहनों के खिलाफ अभियान शुरू होता है तो राजनेताओं के प्रभाव के बाद कोई कार्रवाई नहीं हो पाती।

पार्किंग और नो-पार्किंग जोन भी हवा-हवाई

ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए इंप्रूवमेंट ट्रस्ट ने करीब एक दशक पहले शहर में पार्किंग और नो पार्किंग जोन बनाए थे। इसके लिए विभाग ने एपीके रोड तथा पटेल चौक मार्ग पर पार्किंग जोन और नो पार्किंग जोन बनाकर स्कूटर, मोटरसाइकिल के लिए पार्किंग फीस संबंधी रेट लिखवा कर बोर्ड भी लगवा दिए, मगर प्रशासन ने इस पर अमल ही नहीं किया। कोट्स

यातायात नियम तोड़ने वालों के खिलाफ विभाग समय-समय पर कार्रवाई करता है। साथ ही मियाद पूरी कर चुके वाहनों के खिलाफ भी कार्रवाई जारी है। रिफ्लेक्टर नहीं लगाने वाले वाहन चालकों के भी चालान काटे जाते हैं।

सुरेंद्र कुमार, ट्रैफिक प्रभारी कॉर्मिशयल वाहनों की होती है फिटनेस जांच : आरटीए

आरटीए बलदेव सिंह ने कहा कि प्राइवेट स्तर पर कार, मोटरसाइकिल और अन्य वाहनों की खरीद पर एकमुश्त टैक्स लिया जाता है। जबकि कॉमर्शियल वाहनों आटो, बस, कैंटर, ट्रक की एक-एक साल बाद फिटनेस जांच की जाती है। जांच करने की ये प्रक्रिया मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर की देखरेख में की जाती है। वह खुद पुलिस के ट्रैफिक विग और उनकी टीम नाकाबंदी कर ऐसे वाहनों से जुर्माना वसूलती है।

Posted By: Jagran

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