जागरण संवाददाता,नवांशहर : शनिवार को सर्दियों की पहली धुंध ने दस्तक दे दी है। धुंध पड़ने से गाड़ियों की रफ्तार भी धीमा हो गई और वाहनों को दिन में भी लाइटे जला कर गुजरना पड़ा। सुबह 11 बजे तक वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती रही। सारा दिन लोग सूरज के दर्शन करने के लिए तरसते रहे। धुंध पड़ने से विजिब्लिटी काफी कम हो गई, जिससे सड़क पर 300 मीटर के आगे कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा है। शनिवार सुबह पराली के कारण जिले में छाई स्मोग को देखते हुए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। शनिवार की छुट्टी होने के बाद भी डिप्टी कमिश्नर ने एक प्रेस नोट जारी करके पराली जलाने वाले किसानों को सख्त हिदायत दी गई है। उन्होंने कहा कि अब अगर किसी किसान ने पराली को जलाया तो पुलिस की धारा 188 के तहत सख्त कारवाई की जाएगी। वहीं अब खेतों में पराली को आग लगाने पर पटवारी संबंधित किसान की जमीन के रिकार्ड पर लाल पेन से निशान लगाएंगें, जिससे किसान को सरकारी सब्सिडी और सुविधाएं नहीं मिलेंगी। बाक्स के लिए-

पराली जलाने वाले किसानों के हो चुके है चालान जिले में पराली जलाने के 166 मामले सामने आ चुके हैं। जिनमें 2 लाख 60 हजार रुपए के चालान किए जा चुके हैं। पिछले वर्ष पराली को आग लगाने के 251 मामले सामने आए थे। किसानों की ओर से खेतों में जलाई जा रही पराली 15 प्रतिशत तक प्रदूषण बढ़ा रही है। बैठक में डीसी ने दी थी सख्त हिदायत

डीसी विनय बुबलानी ने जिले में पराली जलाने की घटनाओं की जानकारी लेकर हिदायत की कि बिना एसएमएस सिस्टम से चलने वाली कंबाइनें तुरंत जब्त की जाए। जहां भी कोई किसान पराली को जलाने की कोशिश करता है तो पहले उसे समझाकर ऐसा करने से रोका जाए। अगर वह फिर भी न माने तो उसका चालान करके, उसके माल रिकार्ड में रेड एंट्री दर्ज करवाई जाए। पराली के धुएं से रहें दूर : डॉ. विकास आवीवाई अस्पताल के मेडिसन के डाक्टर डॉ.विकास ने कहा कि पराली जलाने से उठा धुंआ बेहद खतरनाक होता है। आंखों के अलावा फेफड़ों में सांस के जरिए अंदर जाने से बड़ा नुकसान कर सकता है। हाल ही में आंखों में जलन व नाक में खारिश जैसे केस सामने आ रहे हैं। अस्थमा के मरीजों के लिए यह हालात बहुत खतरनाक हैं।

Posted By: Jagran

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