जयदेव गोगा, नवांशहर : प्लास्टिक का कम से कम उपयोग करके हम पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचा सकते हैं। पॉलीथिन और अन्य प्लास्टिक की चीजों का बेतहाशा इस्तेमाल आज पर्यावरण के लिए गंभीर समस्या बन गया। इसलिए सभी लोगों को पॉलीथिन को छोड़कर पुराने समय के थैले लेकर सामान लाने के लिए बाजार निकलना चाहिए। सरकार ने भी इस समस्या से निपटने के लिए राष्ट्रीय मुहिम शुरू कर दी है, जिसमें सभी लोगों को सहयोग करना चाहिए। नुकसानदायक है। सिगल यूज प्लास्टिक से निजात दिलाने में लोग अपनी अहम भूमिका निभा सकते हैं। प्लास्टिक बैग्स की समस्या को लेकर समाज के विभिन्न वर्गो के लोगों से बातचीत की गई जिस पर उन्होंने चिंता जताई और जागरूकता पर जोर दिया।

समस्या से निजात पाने के लिए जागरूकता जरूरी : धर्म चंद

रिटायर्ड हिदी अध्यापक धर्म चंद ने कहा, जिले में बड़ी संख्या में अब भी पॉलीथिन और इससे बने लिफाफों का इस्तेमाल हो रहा है। लोग इससे होने वाले दुष्परिणामों के बारे में जानते हुए भी पॉलीथिन के लिफाफे इव इससे बनी वस्तुओं को इस्तेमाल कर लगातार धरती को जहरीला बना रहे हैं। क्षेत्र वासियों को सुझाव है कि मार्केट से सामान लाने के लिए घर से कैरी बैग लेकर चलें। इस समस्या को खत्म करने के लिए लोगों की जागरूकता जरूरी है।

संसद में प्लास्टिक की पनी की बोतलें बैन : जोगिंदर राम

मास्टर जोगिदर राम ने बताया कि देश के सरकारी संस्थान एक बार प्रयोग में आने वाली प्लास्टिक की चीजों का इस्तेमाल बंद करने जा रहे हैं। लोक सभा सचिव ने भी संसद में प्लास्टिक की पनी की बोतलों पर बैन लगा दिया है। हमें भी श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाशोत्सव पर शुरू होने वाली मुहिम का हिस्सा बनना चाहिए। क्षेत्र के सभी लोग प्लास्टिक के इस्तेमाल पर अगर रोक लगाएं तो एक प्रशंसनीय कदम होगा।

समय से संभलेंगे तो नहीं आएगी की समस्या : युवराज

दुकानदार युवराज कृष्ण शर्मा का कहना है कि क्षेत्र के अंदर प्लास्टिक का दखल लगातार बढ़ रहा है। जिस प्लास्टिक को हम अपनी रोजमर्रा की जिदगी का हिस्सा बनाए हुए हैं, वह आने वाले समय में हमारे लिए बड़ा ही घातक सिद्ध होने वाला है। समय रहते अगर हम संभल जाएंगे तो बहुत सारी समस्याओं से सभी लोगों को छुटकारा मिल सकता है। अगर हम निश्चित कर लें तो प्लास्टिक उत्पाद पर भी रोक लगाई जा सकती है।

बदलनी होगी आदत, इसी में है सभी की भलाई : अशोक

रिटायर्ड जूनियर सहायक डीसी अशोक कुमार ने बताया कि क्षेत्र के लोगों के लिए प्लास्टिक से परहेज करने में ही समझदारी है। हमें बाजार से सामान खरीदने के लिए अपने घर से ही कपड़े या जूट से बने थैले को लेकर जाना चाहिए। इसके अलावा अगर कोई दूसरा विकल्प हो तो भी अच्छा है। लेकिन प्लास्टिक के लिफाफों में सामान लेकर घर जाने की आदत को बदलना होगा। इसी में सभी की भलाई है।

बोतल बंद पानी में होते हैं प्लास्टिक के कण : वासदेव

पंडित वासदेव ने बताया कि प्लास्टिक की खोज मानव जाति की भलाई के लिए की गई थी, लेकिन आज जिस बंद बोतल में पानी को मिनरल वाटर समझकर हम पी रहे हैं, उस पानी में प्लास्टिक के सूक्ष्म कण होने की बात विशेषज्ञों ने जाहिर की है और यही प्लास्टिक के टुकड़े भूजल में मिलकर पानी को दूषित करते हैं। पीने के पानी के लिए हमें पारंपरिक बर्तनों का इस्तेमाल करने या किसी अन्य महफूज साधन का इस्तेमाल करने की आदत डालनी चाहिए। --------------

Posted By: Jagran

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