जागरण संवाददाता,नवांशहर: एनएचएम कर्मियों ने मांगों को लेकर सिविल सर्जन कार्यालय से लेकर डिप्टी कमिश्नर कार्यालय तक रोष रैली निकाल डिप्टी कमिश्नर को कोरोना योद्धा के तौर पर मिले सम्मान चिन्ह को लौटाया। नेताओं ने कहा कि सरकार से लगातार लगभग डेढ़ दशक से पक्का करने की मांग को लेकर पक्के मुलाजिमों से करीब पांच फीसद कम वेतन पर काम कर रहे हैं। सिविल सर्जन दफ्तर में जारी आठवें दिन के धरने के दौरान गुरप्रसाद सिंह ने बताया कि सरकार ने कुछ दिन पहले 36000 मुलाजिम को पक्का करने संबंधी एक बयान जारी किया गया था, जिस संबंधी पेश होने जा रहे बिल को पढ़कर एनएचएम मुलाजिम में रोष है। इसलिए मुलाजिमों को पक्के तौर इस संबंधी 16 नवंबर से अब तक सेहत सेवाएं ठप करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। सरकार के पेश होने जा रहे इस बिल में स्पष्ट किया गया है कि पक्के किए जाने वाले मुलाजिम में उन मुलाजिमों को नहीं लिया जाएगा, जोकि केंद्र या पंजाब सरकार की स्कीमों के अंतर्गत अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके अलावा इस बिल में कम से कम सेवा 10 साल वाले मुलाजिम को ही लेने व परख काल रखने का समय तीन साल होने और उम्र भी 45 साल रखने के विरुद्ध मुलाजिमों को काम ठप करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।इसलिए जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता, उनकी हड़ताल जारी रहेगी। इस मौके पर अरुण दत्त और मनिदर सिंह ने कहा कि सरकार यदि इन मांगों पर नोटिफिकेशन जारी करती है, तो ही सेहत सेवाओं को खोला जाएगा। इस मौके पर साहिल सैणी. डा. हरदीप, परमिदर कौर, रविदर कौर, सुनीता रानी, गुरप्रीत सिंह खालसा, कमलदीप सिंह, गुरप्रीत सिंह गढ़ी, मनदीप कौर, डा. रुपिदर, दीपक वर्मा, सुनीता रानी, रमनदीप कौर, बबीता लंगोटी, डा. विजय आदि एनएचएम मुलाजिम उपस्थित थे।

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