रोहित कुमार जैन, राहों

गांव बहलूर कलां की एक महिला ने 12 साल पहले यह सोच कर नसबंदी करवाई थी कि अब उसका एक बेटी व दो बेटों का परिवार पूरा हो चुका है। जिसे अब और नहीं बढ़ाना है। उसका पति मेहनत मजदूरी करके ज्यादा बड़े परिवार का पालन पोषण नहीं कर सकता।

इसके चलते उन्होंने आपसी सलाह से नसबंदी करवाने का फैसला लिया था, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि सेहत विभाग द्वारा की गई नसबंदी भी फेल हो सकती है। 12 साल बाद एक बच्ची ने जन्म लिया। फेल नसबंदी का नतीजा यह निकला है कि घर का खर्च चलाने के लिए घर के एक नाबालिग बच्चे को पढ़ाई से हटा कर अब काम पर लगवाना पड़ा है। जब इस परिवार ने सेहत विभाग से मुआवजे की मांग की तो सेहत विभाग ने नसबंदी होने की बात से साफ इनकार कर दिया और मनजीत कौर का रिकार्ड न होने की बात कह कर पल्ला झाड़ रहा है।

मनसा राम ने बताया कि उनके परिवार में अब दो लड़कियां व दो लड़के हैं। दो अगस्त 2005 को उनकी पत्नी मनजीत कौर ने छोटे बेटे को जन्म दिया था। इसके बाद एएनएम की सलाह व परिजनों की रजामंदी से उनकी पत्नी की नसबंदी करवा दी थी। डाक्टरों ने तब कहा था कि अब उनका परिवार नहीं बढ़ेगा। अब 12 साल बाद उनके घर बेटी का जन्म हुआ है। इससे अब उन पर आर्थिक बोझ और बढ़ गया है। वह हैरान है कि जब उनकी पत्नी का ऑपरेशन हुआ था तो उसकी पत्नी ने बच्ची को जन्म कैसे दे दिया। उनके घर की हालत ऐसी नहीं है कि वह दिहाड़ी करके दो बेटियों, दो बेटों, पिता, एक ताया व पत्नी सहित आठ लोगों के परिवार का खर्च उठा सके।

मनसा राम बताते हैं कि वह मजदूरी का काम करते हैं। बुजुर्ग ताया अंधेपन का शिकार हो गया है। पिता अधरंग से पीड़ित हैं। मजदूरी से उनका घर का खर्च नहीं चल पाता। बेटी के जन्म के बाद उन्होंने अपने बेटे की पढ़ाई छुड़वा कर दुकान पर काम पर लगवा दिया है।

मनजीत कौर बताती है कि पहले तो उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ कि वह गर्भवती हो गई हैं। तीसरे चौथे महीने जब उन्होंने अस्पताल में जाकर जांच करवाई तो जाकर इसकी पुष्टि हुई। वह बताती है कि जब उन्होंने नसबंदी करवाई थी तब सरकारी अस्पताल की ओर से उन्हें सरकार की स्कीम की आर्थिक मदद भी दी गई थी।

इस संबंध में पहले उन्होंने सेहत विभाग से इसकी शिकायत की तो सेहत विभाग ने उन्हें लिखित में जवाब दिया कि उनकी नसबंदी का कोई रिकार्ड ही नहीं है। इसके बाद उन्होंने डिप्टी कमिश्नर से शिकायत की तो डीसी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सेहत विभाग से इसकी जवाब तलबी की। सेहत विभाग ने डीसी को भी गलत जानकारी दी कि उनके पास मनजीत कौर का कोई रिकार्ड नहीं है। बाक्स---

एक साल से धक्के खा रहा है पीड़ित परिवार

गांव बहलूर कलां निवासी मनसा राम पिछले एक साल से सेहत विभाग व जिला प्रशासन के दफ्तरों के धक्के खा रहा है। उसके घर बेटी का जन्म 27 सितंबर 2017 को हुआ था। इस एक साल में तब से लेकर आज तक कई बार सिविल सर्जन, डिप्टी कमिश्नर, एसएमओ मुजफ्फपुर को लिखित शिकायत दे चुके हैं, लेकिन सेहत विभाग की ओर से उनकी पत्नी का किसी भी तरह का रिकार्ड न होने की बात कही जा रही है। 2005 में वह आशा वर्कर ने साथ तीन अन्य महिलाओं की भी सिविल अस्पताल नवांशहर में नसबंदी करवाई थी, जिसका उन्हें सरकार की और से आर्थिक मदद भी दी गई थी। इसके बावजूद भी उनकी पत्नी का रिकार्ड सेहत विभाग के रिकार्ड में क्यों नहीं है? बाक्स---

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मुआवजे का केस बनाकर फिर से भेजा जाएगा : सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डॉ. गु¨रदर कौर चावला से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मनजीत कौर के केस की फाइल जुलाई महीने में मुआवजे के लिए भेजी गई थी। इस पर अगस्त महीने में आवजेक्शन लग कर फाइल वापिस आ गई। अब फिर से इस फाइल की कमियों को पूरा करके दोबारा केस मुआवजे के लिए भेजा जाएगा। मुआवजा मंजूर होने के बाद मुआवजा परिवार को दिया जाएगा।

Posted By: Jagran