जागरण संवाददाता, नवांशहर

जिला परिषद व पंचायत समिति के अलावा पंचायत चुनाव में गांव कुलाम की कॉलोनियों में रहने वाले करीब 135 लोग अपने मतदान का प्रयोग नहीं कर पाएंगे।

बताया जा रहा है कि यह क्षेत्र बीते समय के दौरान शहर की बढ़ाई गई हदबंदी के कारण शहर से जुड़ गया है, इसलिए यह क्षेत्र नगर कौंसिल के तहत आ गया है। मगर ग्रामीण क्षेत्र में वोट का अधिकार न मिल पाने की वजह से लोग परेशान हैं। हालात यह हैं कि बीते कौंसिल चुनाव में भी उन्हें शहरी क्षेत्र में मतदान करने का अधिकार नहीं मिल पाया था। इस वजह से वे नहीं समझ पा रहे हैं कि वे किस क्षेत्र के वोटर हैं, वे शहर के वोटर हैं या ग्रामीक्ष क्षेत्र के वोटर।

इस वजह से वे इन चुनावों में अपनी वोट गांव की पंचायत में डालने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। हालांकि अब उनकी उम्मीद की किरण मद्धम होती जा रही है।

मामले को लेकर मंगलवार को गांव कुलाम की कॉलोनियों में रहने वाले लोगों का एक प्रतिनिधी मंडल बीडीपीओ राजेश चड्ढा से मुलाकात की। इस संबंधी जानकारी देते हुए सुच्चा ¨सह, बलवीर ¨सह, रशपाल, अमनदीप, तारा चंद और हंस राज ने बताया कि वे बीते करीब 20-25 सालों से गांव की कॉलोनियों में रह रहे हैं। साल 2013 में उन्हें पता चला कि उनकी वोटें नगर कौंसिल नवांशहर के किसी वोर्ड के साथ जोड़ दी गई हैं। मगर बीते सालों में नगर कौंसिल के हुए चुनाव में भी उनकी वोट इसलिए पोल नहीं हुई कि उनकी वोटें ग्रामीण क्षेत्र में पड़ता है। साल 2017 के विस चुनावों में उनकी तरफ से गांव कुलाम के वोटर के रूप में वोट डाली गई थी।

अब जब पंचायत चुनाव से संबंधित वोटर सूची की जांच की गई तो पता चला कि उनकी वोटें गांव की सूची से भी काट दी गई हैं। करीब 135 वोटर हैं जो कालोनियों में रह रहे हैं। हालात यह है कि अब न तो वे शहरी क्षेत्र के ही मतदाता रहे हैं और न ही वे ग्रामीण क्षेत्र के। उन्होंने कहा कि वे देश के नागरिक हैं, मगर वे गांव की ही कॉलोनियों में रहते हुए भी ग्रामीण क्षेत्र की वोटों में मतदान नहीं कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें शहरी क्षेत्र वाली कोई भी सुविधा नहीं मिल रही। न तो उनकी आबादी में सीवरेज सिस्टम है और न ही वाटर सप्लाई व स्ट्रीट लाईट की सुविधा। इस सबके बीच न ही उन्हें शहर में वोट देने का ही अधिकार इस बार मिल पाया है। इसलिए वे परेशान हैं कि वे कहां जाएं व किसका दरवाजा खटखटाएं, ताकि उनका छिन रहा वोट का अधिकार उन्हें मिल सके।

उधर, बीडीपीओ राजेश चड्ढा ने कहा कि बीते समय में शहर की बढ़ाई गई हदबंदी के दौरान गांव कुलाम की कॉलोनियों वाला क्षेत्र शहरी क्षेत्र में आ गया था। इस वजह से वे अब शहरी क्षेत्र के वोटर हैं, वे पंचायती चुनाव या जिला परिषद चुनाव में वोट नहीं डाल सकते।

Posted By: Jagran