संवाद सहयोगी, नवांशहर: संयुक्त किसान मोर्चे की तरफ से किए गए भारत बंद के ऐलान को कामयाब बनाने के लिए कुल हिद किसान सभा जिला शहीद भगत सिंह नगर के जनरल सचिव कामरेड जसविदर सिंह भंगल, पंजाब खेत मजदूर सभा के जिला प्रधान कामरेड मुकंद लाल, ट्रेड यूनियन एटक के जिला कनवीनर कामरेड स्वतंत्र कुमार और फेडरेशन नेता कामरेड नरिदर कुमार कालिया ने गांव करियाम, साहलों और कस्बा औड़ के बस अड्डे पर खुली बैठकें की। बैठकों में शामिल लोगों को नेताओं ने केंद्र और पंजाब सरकार की लोक विरोधी नीतियों और किसान संघर्ष से अवगत कराते हुए कहा कि सभी ने लोगों से झूठे वादे कर राज गद्दी हासिल की है। केंद्र और राज्य दोनों ही सरकारों ने अपने फैसलों से कार्पोरेट घरानों का विकास और आम जनता का का विनाश किया है। उन्होंने कहा कि इन सरकारों ने तरह-तरह के मजदूर, कर्मचारी, दुकानदार और किसान विरोधी कानून बनाए। जनता की आवाज दबाने के लिए कोरोना महामारी, देशद्रोह, टाडा और यूएपीए जैसे कानूनों को हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया है। सभी पब्लिक संस्थानों को एक-एक कर कार्पोरेट घरानों को बेचा जा रहा है।

मजदूरों व मुलाजिमों को राहत पहुंचाने वाले 44 कानूनों को रद कर चार लेबर कोड बना दिए गए। कृषि विकास की राह में रोड़े डालकर किसान विरोधी कानून बना दिए गए। जिससे देश का हर वर्ग प्रभावित हो रहा है। इन किसान विरोधी कानूनों को रद करवाने के लिए किसान, मजदूर दिल्ली के बार्डरों पर करीब दस महीनों से धरना लगाकर बैठें हैं। लेकिन सत्ता के नशे में चूर केंद्र सरकार को इनकी आवाज सुनाई नहीं दे रही है। जिसे नींद से जगाने के लिए 27 सितंबर को संपूर्ण भारत बंद करने का ऐलान किया गया है। जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन मिल रहा है।

उन्होंने केंद्र और पंजाब सरकार से मांग करते हुए कहा कि जल्द से जल्द इन किसान विरोधी कानूनों को रद किया जाए। इस मौके पर गांव करियाम से अनूप सिंह, अनमोल, जसविदर सिंह, देस राज नागी, केवल सिंह, जीत राम, गांव साहलों से जोगिदर पाल, सुदेश कुमार, कुलदीप कुमार, अश्वनी कुमार, सोहन सिंह, बूटा राम, कमलजीत, जरनैल सिंह पूर्व सरपंच साहलों, गांव औड़ से केहर चंद गरचा, कुलदीप कुमार, संजीव कुमार गरचा और कामरेड जोगिदर राम मौजूद थे।

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