जयदेव गोगा, नवांशहर : पंजाब सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून को रद्द करने की मांग की है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के वरिष्ठ और पूर्व कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने बड़ा बयान दिया है। सिब्बल ने कहा कि संसद से पारित हो चुके सीएए को कोई राज्य लागू करने से मना नहीं कर सकता, ऐसा करना असंवैधानिक होगा। सिब्बल के मुताबिक कोई राज्य यह नहीं कह सकता कि इसे लागू नहीं करूंगा, यह संभव नहीं है और यह असंवैधानिक भी है। केरल राज्य ने तो सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने के साथ-साथ इसे सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दे रखी है। आखिर यह कहां तक उचित है कि जिस मसले पर सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया जाए, उसी को लेकर सड़कों पर भी उतरा जाए।

विरोध करना ठीक नहीं : सुरेंद्र मोहन

रिटायर्ड अध्यापक सुरेंद्र मोहन चोपड़ा ने कहा कि संसद में पारित कानून का सड़कों पर इस तरह का विरोध करना ठीक बात नहीं है। विपक्षी पार्टियों का इस प्रकार का विरोध संवैधानिक अराजकता को ही जन्म देगा, क्योंकि नागरिकता पूरी तरह से केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र का विषय है। इस विषय पर केंद्र सरकार को सीधी चुनौती देना सस्ती राजनीतिक के बिना और कुछ नहीं है। विपक्ष को यह सोचना चाहिए कि भारतीय लोकतंत्र की तारीफ करने वाले तमाम देश उनकी ऐसी हरकतों के बारे में क्या सोच रहे होंगे।

संवैधानिक तौर तरीकों का अनादर: राम कुमार

व्यवसायी राम कुमार शारदा ने कहा कि सीएए जैसे राष्ट्रीय महत्व के जरूरी कामों में विपक्ष की ऐसे अडंगेबाजी संवैधानिक तौर तरीकों का खुला अनादर है। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तो केंद्र सरकार के प्रति अंध विरोध से इतनी ग्रस्त है कि कई जन कल्याणकारी योजनाओं को भी बंगाल से बाहर किए हुए हैं। बंगाल सरकार तो राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर, जोकि जनगणना के तहत एक संवैधानिक दायित्व है, की प्रक्रिया में शामिल होने से भी इंकार कर रही है।

विपक्ष सीएए को मुस्लिम विरोधी बता रहा: छिब्बा

अध्यापक सुनील कुमार छिब्बा ने बताया कि दुनिया भर में भारतीय लोकतंत्र की बढि़या मिसाल दी जाती है। अब इस मिसाल को छिन्न भिन्न करने का काम किया जा रहा है। विपक्ष की और से सीएए को मुस्लिम विरोधी बताने की होड़ मची है। मुस्लिम समाज को भ्रमित और भयभीत किया जा रहा है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि बाकी वर्गों की तरह मुस्लिम वर्ग का हित भी देश हित के साथ पूरी तरह जुड़ा हुआ है।

उत्पीड़न के शिकार नागरिकता पाने के हकदार: पाठक

मास्टर जीवन कुमार पाठक का कहना है कि धार्मिक उत्पीड़न के शिकार शरणार्थी स्वभाविक तौर पर भारत में नागरिकता पाने के हकदार हैं। एक धर्म निरपेक्ष देश होने के नाते भारत को पाकिस्तान, बंगलादेश व अफगानिस्तान के उन अल्पसंख्यकों पर तबज्जो देनी ही होगी, जोकि वहां पर धार्मिक आधार पर उत्पीड़न झेल रहे हैं। क्योंकि यह सबसे खराब किस्म का उत्पीड़न है।

Posted By: Jagran

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