3742 करोड़ का घोटाला: कागजों पर बिका सोना, पंजाब से मुंबई तक हड़कंप; नामी सर्राफा व्यापारियों पर जांच एजेंसी का शिकंजा
डीजीजीआई ने 3,742 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन और 112.4 करोड़ रुपये की फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के महाघोटाले का पर्दाफाश किया है।
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3742 करोड़ का घोटाला: कागजों पर बिका सोना। सांकेतिक फोटो
HighLights
डीजीजीआई ने 3,742 करोड़ रुपये के टैक्स घोटाले का खुलासा किया।
फर्जी रसीदों से 112.4 करोड़ रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा।
पंजाब, चंडीगढ़, महाराष्ट्र में सर्राफा व्यापारियों और मुखौटा कंपनियों पर शिकंजा।
शुभेंदु शुक्ला, नवांशहर। देश में कर चोरी और फर्जी रसीद बनाने का एक बहुत बड़ा मामला सामने आया है। वस्तु एवं सेवाकर आसूचना महानिदेशालय (डीजीजीआई) की अमृतसर क्षेत्रीय इकाई ने 3,742.08 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन और 112.4 करोड़ रुपये की फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (कर-छूट) के घोटाले का पर्दाफाश किया है। इस महाघोटाले के तार पंजाब, चंडीगढ़ और महाराष्ट्र से जुड़े हैं, जिसके दायरे में कई नामी सर्राफा व्यापारी और दर्जनों मुखौटा (फर्जी) व्यापारिक प्रतिष्ठान आ गए हैं।
जांच एजेंसी ने 25 अगस्त 2026 को सख्त कदम उठाते हुए इस गिरोह से जुड़े कुल 31 लोगों और प्रतिष्ठानों को कारण बताओ सूचना-पत्र जारी किया है। जांच में खुलासा हुआ है कि यह पूरा गोरखधंधा वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2025-26 के बीच चलाया गया।
इस खेल के मुख्य सरगना दिवय मोहिंद्रू ने अपनी फर्मों (महावीर आभूषण्स और महादेव बुलियन) के जरिए बिना कोई वास्तविक सोना खरीदे-बेचे केवल कागजों पर फर्जी रसीदों (इनवॉइस) का बड़ा जाल बिछाया। बाजार में नकद में सोना बेचने वाले सर्राफा व्यापारियों ने अपने काले धन को वैध (सफेद) करने के लिए इन फर्जी प्रतिष्ठानों के खातों का जमकर इस्तेमाल किया।
बिचौलियों के जरिए खाते में पैसा भेजा जाता था और दलाली (कमीशन) काटकर नकद राशि वापस कर दी जाती थी। इस कार्रवाई के बाद से अमृतसर, जालंधर, लुधियाना और मुंबई के सर्राफा बाजार में हड़कंप मचा हुआ है। जांच एजेंसी ने केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम की धारा 74 और 122 के तहत अवैध कर-छूट की वसूली और भारी जुर्माने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
क्या है बी-टू-बी और बी-टू-सी, और घोटाले में कैसे हुआ इनका इस्तेमाल?
बी-टू-बी (बिजनेस टू बिजनेस - 175.38 करोड़ का खेल): इसका मतलब एक रजिस्टर्ड कारोबारी द्वारा दूसरे रजिस्टर्ड कारोबारी को माल बेचना है। इस महाघोटाले में सर्राफा व्यापारियों (सप्लायर्स) ने इसी बी-टू-बी बिलिंग का सहारा लिया।
उन्होंने सिर्फ कागजों पर मुख्य आरोपी की फर्मों को 175.38 करोड़ रुपये का सोना बेचा दिखाया, ताकि बिना असली माल भेजे ही फर्जी ''''इनपुट टैक्स क्रेडिट'''' (आईटीसी) मुख्य आरोपी को ट्रांसफर किया जा सके।
बी-टू-सी (बिजनेस टू कंज्यूमर - 3,612.54 करोड़ का खेल): इसका मतलब कारोबारी द्वारा सीधे आम ग्राहक को माल बेचना है, जिसके पास जीएसटी नंबर नहीं होता। घोटालेबाजों ने फर्जी आईटीसी को खपाने के लिए अपनी कुल बिक्री का 94% से 99.9% हिस्सा बी-टू-सी के रूप में दिखाया, जिसकी कुल कर-योग्य कीमत 3,612.54 करोड़ रुपये थी। इसके लिए दिहाड़ी मजदूरों के पैन और आधार कार्ड का इस्तेमाल कर उन्हें फर्जी ग्राहक बताया गया, ताकि कोई पकड़ न सके और काला धन सफेद हो जाए।
ऐसे चल रहा था फर्जीवाड़े का पूरा तंत्र
मजदूरों के दस्तावेजों का दुरुपयोग: आरोपियों ने अपने प्रतिष्ठानों के भारी कारोबार को 'सीधे ग्राहकों को बिक्री' (बी-टू-सी) के रूप में दिखाया। जांच में सामने आया कि जिन खरीदारों के नाम दिखाए गए थे, उन्होंने असल में कभी सोना खरीदा ही नहीं था। इसके लिए दिहाड़ी मजदूरों और आम नागरिकों के पैन और आधार कार्ड का दुरुपयोग कर फर्जी फर्में और बैंक खाते खड़े किए गए।
कूरियर नेटवर्क का दुरुपयोग
दस्तावेजों में दावा किया गया कि सोना मुंबई के आयातकों (सप्लायर्स) से निजी कूरियर सेवा (एम्बे एक्सप्रेस और सीक्वल लॉजिस्टिक्स आदि) के जरिए मंगाया जा रहा है। लेकिन कूरियर कंपनियों की जांच से खुलासा हुआ कि पार्सल कभी मुख्य आरोपी तक पहुंचे ही नहीं। पंजाब के अलग-अलग शहरों के कुछ चुनिंदा सर्राफा व्यापारी सीधे उन कूरियर पैकेट्स को रिसीव कर रहे थे और उनके दस्तावेजों व मोहरों का दुरुपयोग किया गया।
सिर्फ हवा में बनी कर-छूट (फर्जी आईटीसी)
बिना एक ग्राम असली सोने की आवाजाही के, सिर्फ हवा में बनाए गए फर्जी कागजी बिलों के आधार पर 112.4 करोड़ रुपये की अपात्र इनपुट टैक्स क्रेडिट का बड़े पैमाने पर दावा किया गया और उसका उपयोग किया गया।
किन बैंकों में हुआ कितने का खेल?
जांच में मुख्य आरोपी की फर्म (महावीर आभूषण्स) के तीन प्रमुख बैंक खातों (यूको, आरबीएल और एसबीआई) का खुलासा हुआ है। वित्तीय वर्ष 2020-21 और 2021-22 के दौरान इन तीनों खातों को मिलाकर कुल जमा (क्रेडिट) 13,56,72,25,230 रुपये (यानी 1,356.72 करोड़ रुपये) और कुल निकासी (डेबिट) 13,54,35,69,364 रुपये (यानी 1,354.35 करोड़ रुपये) का लेन-देन हुआ।
बैंकों के अनुसार अलग-अलग लेन-देन (वित्त वर्ष 2020-21 और 2021-22) का सटीक आंकड़ा इस प्रकार है:
- एसबीआई बैंक (सिविल लाइंस, जालंधर): कुल जमा (क्रेडिट): 736,68,78,813 रुपये | कुल निकासी (डेबिट): 734,79,82,471 रुपये।
- आरबीएल बैंक (मॉडल टाउन, जालंधर): कुल जमा (क्रेडिट): 422,91,10,172 रुपये | कुल निकासी (डेबिट): 422,48,41,833 रुपये।
- यूको बैंक (गुड़मंडी, जालंधर): कुल जमा (क्रेडिट): 197,12,36,245 रुपये | कुल निकासी (डेबिट): 197,07,45,060 रुपये।
इसके अलावा पंजाब में खुली फर्जी बी-टू-सी शेल कंपनियों ने नकदी के लेनदेन के लिए पीएनबी, एचडीएफसी, एक्सिस, इंडसइंड, आईडीबीआई, यूनियन बैंक और यस बैंक जैसे कई अन्य बैंकों का भी जमकर इस्तेमाल किया।
जांच के घेरे में आए पंजाब और मुंबई के ये नामी चेहरे
इस महाघोटाले में मुख्य आरोपी दिवय मोहिंद्रू की जालंधर स्थित फर्में (महावीर आभूषण्स और महादेव बुलियन) केंद्र में हैं। इसके अलावा जांच के घेरे में आने वाले अन्य प्रमुख व्यापारी और संस्थाएं इस प्रकार हैं:
- पंजाब और चंडीगढ़ के नामी सर्राफा व्यापारी (बी-टू-बी सप्लायर):
- अमृतसर (8 कारोबारी): दुर्गा दास सेठ सर्राफ, ज्ञान चंद कपूर ज्वेलर्स, माणिक एंड कंपनी, सहदेव ऑर्टामेंट्स, टी.आर. एंड संस, एसएएस ओवरसीज, राजा एंड कंपनी, जैन ज्वेलर्स रजिस्टर्ड।
- जालंधर (4 कारोबारी): हर्षित ज्वेलर्स, न्यू एरा डायमंड्स एंड ज्वेलरी, चंदर कुमार एंड संस, वत्सल डायमंड।
- लुधियाना (2 कारोबारी): एस.आर.के. ज्वेलर्स, श्री राम कृष्णा ज्वेलर्स।
- होशियारपुर (1 कारोबारी): श्री कृष्णा ज्वेलर्स।
- चंडीगढ़ (1 कारोबारी): शाम ज्वेलर्स।
- मुंबई की व्यावसायिक संस्थाएं (सप्लायर):
- रितुल ज्वेल्स प्राइवेट लिमिटेड, नाकोडा बुलियन एंड ट्रेडर्स, एसपीएन गोल्ड एंड प्रेशियस मेटल्स, सुपारशव बुलियन, मंत्रा गोल्ड, महेश ज्वेल्स, ऑल इंडिया बुलियन और अरिहंत बुलियन एंड ज्वेल्स आदि जांच के घेरे में हैं।
पंजाब की मुखौटा (फर्जी बी-टू-सी) संस्थाएं
काले धन को सफेद करने के लिए पंजाब (मुख्यतः लुधियाना, खन्ना आदि) में दर्जनों फर्जी शेल कंपनियां बनाई गईं, जिनमें कृष्णा एंटरप्राइजेज, सूर्या एंटरप्राइजेज, सालासर एंटरप्राइजेज, गणपति ट्रेडर्स, दीप एंटरप्राइजेज, श्री बांके बिहारी इंडस्ट्रीज आदि शामिल हैं।
काले धन को सफेद करने का बैंकिंग खेल
जो सर्राफा व्यापारी बाजार में नकद में सोना बेचते थे, वे अपनी उस नकदी को वैध रूप देने और बैंकिंग चैनल में लाने के लिए इन फर्जी फर्मों के खातों का उपयोग करते थे। बिचौलियों के जरिए पैसे बैंक खातों में ट्रांसफर किए जाते थे और बदले में आरोपी कमीशन (0.10% से 0.80% तक) काटकर नकद राशि वापस कर देता था।
