संवाद सूत्र, श्री मुक्तसर साहिब

अगर व्यक्ति अपनी पूरी लगन के साथ कोई भी कार्य करता है तो उसे कभी हार का मुंह नहीं देखना पड़ता। इसलिए हर कार्य पूरी लगन के साथ करें। हाथ आए अवसर को कभी न गंवाएं। अवसर सूर्योदय की तरह होते हैं। यदि ज्यादा देर प्रतीक्षा करेंगे तो अवसर कब हाथ से निकल जाएगा, पता ही नहीं चलेगा। ये विचार श्री कल्याण सच्चिदानंद आश्रम वृंदावन के स्वामी सच्चिदानंद जी ने श्री रघुनाथ मंदिर में आयोजित सत्संग कार्यक्रम के समापन समारोह के दौरान प्रवचनों की अमृतवर्षा करते हुए व्यक्त किए। स्वामी जी ने कहा कि कुछ लोग सफलता के सपने देखते हैं, जबकि कुछ लोग जागते हैं और सपने पूरे करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। कामयाबी कभी बड़ी नहीं होती, हमेशा उसे हासिल करने वाला ही बड़ा होता है। दरार कभी बड़ी नहीं होती, हमेशा उसे भरने वाला बड़ा होता है। इसलिए सपने देखें हैं तो उन्हें पूरा करने को प्रयास भी करें। बिना कुछ किए बैठे-बिठाए सपने पूरे नहीं होते। सफलता की कुंजी यही है कि अगर जिदगी में कुछ पाना है तो तरीके बदलो, न कि अपने इरादे।

सच्चिदानंद जी ने कहा कि दुनिया का सबसे कीमती गहना परिश्रम है और जिदगी का सबसे अच्छा साथी आत्मविश्वास होता है। कथा के समापन समारोह मौके मंदिर में हवन यज्ञ भी हुआ। जिसमें श्रद्धालुओं ने विधिवत ढंग से आहुतियां डाल पुण्य-लाभ कमाया। हवन यज्ञ करवाने की रस्म मंदिर के पुजारी पं. आदेश शर्मा मन्नू ने अदा की। स्वामी सच्चिदानंद जी ने श्रद्धालुओं को हवन यज्ञ में आहुतियां डलवाईं।

इस मौके पर अशोक तेरिया, कुशल गिरधर, टीटू बिरला, सुभाष गुंबर, नीला कुब्बा, सुभाष ग्रोवर, राज खुराना, मेघराज गर्ग दोदे वाले, कमल जैन, देवराज कसरीजा परिवार समेत अन्य भी मौजूद थे।

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