संवाद सूत्र, मलोट (श्री मुक्तसर साहिब): मलोट इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट एंड इन्फर्मेशन टेक्नोलाजी (मिमिट) के समूह स्टाफ को पिछले चार महीनों से वेतन न मिलने पर स्टाफ की ओर से कलम छोड़ हड़ताल शुरू कर दी गई है। बीते बुधवार से शुरू की गई यह हड़ताल वीरवार को भी जारी है। स्टाफ ने मिमिट परिसर में धरना देकर राज्य सरकार के खिलाफ रोष व्यक्त किया। इस दौरान उन्होंने जल्दी ही वेतन जारी न होने पर और कड़े संघर्ष की चेतावनी दी।

संस्थान की ज्वाइंट एक्शन कमेटी के नेताओं ने कहा कि यह संस्थान विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा देने के साथ-साथ राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में अच्छे वेतन पर प्लेसमेंट कराने में पहले स्थान पर रहता है। लेकिन त्रासदी यह है कि इन विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले प्रोफेसरों व अन्य स्टाफ को अकसर छह-छह महीने वेतन नहीं मिलता है। अब पिछले चार महीनों से स्टाफ को वेतन नहीं मिला है। जिसके चलते उनके घरों की आर्थिक हालत बदतर हुई पड़ी है। स्टाफ को अपनी रोजमर्रा की जिदगी चलानी मुश्किल हो रही है। स्टाफ अपने बच्चों की स्कूल फीस तक भी नहीं भर पा रहा है। स्टाफ में 100 से अधिक तो ऐसे कर्मचारी भी हैं, जोकि मामूली वेतन पर ठेकेदार के माध्यम से नियुक्त हैं। उनके घरों की हालत तो और भी दयनीय हो गई है। राज्य सरकार की ओर से दिसंबर 2020 में संस्थान को पांच करोड़ रूपये की ग्रांट जारी करने का पत्र जारी किया गया था। लेकिन इस पत्र के बावजूद अभी तक ग्रांट जारी नहीं हुई है। इतना ही नहीं पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप के अधीन भी पिछले तीन सालों का 5.50 करोड़ रुपये राज्य सरकार की ओर बकाया खड़ा है। इतनी दिक्कतों के बावजूद संस्था की ज्वाइंट एक्शन कमेटी की ओर से विद्यार्थियों की पढ़ाई का नुकसान नहीं होने दिया जा रहा है। स्टाफ सुबह के पढ़ाई के समय की बजाय दोपहर दो से शाम के पांच बजे तक हड़ताल कर रहा है।

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