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संवाद सूत्र, गिद्दड़बाहा (श्री मुक्तसर साहिब)

दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से डेरा बाबा गंगा राम में पांच दिवसीय श्री कृष्ण कथा का आयोजन किया गया। आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुमेधा भारती ने कहा कि सकल विश्व की माता से मंडित गाय हमारी भारतीय संस्कृति की मेरूदंड हैं। गाय के सुरक्षित रहने पर ही मानव जीवन व सकल वसुंधरा सुरक्षित रह सकती हैं।

उन्होंने कहा कि पुरातन भारत में गाय को मां कहकर उसकी पूजा का विधान था जो अब तक चला आ रहा हैं। पुरातन भारत में जब किसी को दान-दक्षिणा दी जाती थी या बेटी को दहेज दिया जाता था, तो इस में गोदान ही सवोर्परि था। भारत में हमारी भारतीय नस्ल की गांयों के दूध, दही इत्यादि पंचगव्य पदार्थो से हमारा भरण-पोषण करती थी। गाय के मूत्र में अनेकों ही अच्छे तत्व पाए जाते हैं। जिनकी गुणवता को देख कर वैज्ञानिकों ने इसे उतम स्वास्थ्य रसायण का नाम दिया। त्रासदी का विषय तो यह हैं कि आज हम अपनी माता का सम्मान करना ही भूल गए हैं। गाय कत्लखानों में कट रही हैं। विदेशी जिस गाय के महत्व को समझ रहे हैं हम अपनी उसी गाय की महानता को भुला कर रूग्ण हो रहे हैं। भारतवासियों को समय रहते अपनी माता के संवर्धन व सरंक्षण के लिए आगे आना होगा। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान ने गाय संरक्षण व संवर्धन के लिए ठोस कदम उठाया है। संस्थान के कामधेनु प्रकल्प के तहत अनेकों गोशालाओं का निर्माण किया गया। वैज्ञानिकों व रिर्सच टिपस के लिए गोशालाएं रिर्सच सैंटर बन चुकी हैं। बिना किसी बाहरी सहायता के पिछले दस सालों में कामधेनु प्रकल्प ने गो संवर्धन व नस्ल सुधार ने इतनी सफलता प्राप्त की कि भारत सरकार ने इस प्रकल्प को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आहवान करता हैं कि वह गौ संरक्षण के लिए जाग्रत हो।

कथा में सुनील बांसल, नवनीत बांसल, अशोक कुमार, श्याम लाल, कृष्ण लाल मोंगा, चिकु मोंगा, रिक्की जिदल, संजय गर्ग, गोपाल, छिदी जैन, दीपक गर्ग, मिठन लाल गर्ग व अमित कुमार बांसल भी उपस्थित थे।

Posted By: Jagran

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