संवाद सूत्र, श्री मुक्तसर साहिब

सोमवार से श्राद्धपक्ष प्रारंभ हो रहे हैं जो छह अक्टूबर बुधवार को समाप्त होंगे। खास बात यह है कि 26 सितंबर को कोई श्राद्ध नहीं होगा। चतुर्दशी और अमावस्या का श्राद्ध इस बार एक ही दिन छह अक्टूबर को होगा। पितृ पक्ष का हिदू धर्म में विशेष महत्व बताया गया है। पितृ पक्ष में जो पूर्वज अपनी देह का त्याग कर चले जाते हैं उनकी आत्मा की शांति के लिए तर्पण किया जाता है। इसे श्राद्ध भी कहा जाता है। ये विचार पं. पूरन चंद्र जोशी ने गांधी नगर स्थित कार्यक्रम में श्राद्ध के संबंध में जानकारी देते हुए व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि मान्यता के अनुसार पितृ पक्ष में मृत्युलोक के देवता यमराज आत्मा को मुक्त कर देते हैं, ताकि वे अपने परिजनों के यहां जाकर तर्पण ग्रहण कर सकें। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पितृ पक्ष में पितरों का तर्पण करने से पितृदोष दूर होता है। जन्म कुंडली में पितृदोष होने से व्यक्ति को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ज्योतिष शास्त्र में पितृदोष को अशुभ फल देने वाला दोष माना गया है। जिन लोगों की कुंडली में यह दोष पाया जाता है, उन्हें हर कार्य में बाधा का सामना पड़ता है। मान सम्मान में भी कमी बनी रहती है। जमा पूंजी नष्ट हो जाती है। रोग आदि भी घेर लेते हैं।

पितृ पक्ष में श्राद्ध और तर्पण करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है जिससे जीवन में आने वाली परेशानियों से मुक्ति मिलती है। ऐसा माना जाता है कि श्राद्ध न करने की स्थिति में आत्मा को पूर्ण रूप से मुक्ति नहीं मिल पाती है। पितृ पक्ष में पूजा और याद करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और उनकी आत्मा को शांति मिलती है। पंचांग के अनुसार पितृपक्ष 20 सितंबर 2021, सोमवार को भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि से आरंभ हो रहा है। पितृपक्ष का समापन छह अक्टूबर को आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर होगा। सोमवार को भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा की तिथि को है। पितृ पक्ष में नियम और अनुशासन का पालन करना चाहिए, तभी इसका पूर्ण लाभ प्राप्त होता है।

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