संवाद सूत्र, श्री मुक्तसर साहिब

सावन में भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि जो कोई भक्त सावन सच्चे मन से महादेव की आराधना करता है उसकी सारी मुरादें पूरी होती हैं। शिवजी की आराधना के लिए सावन में सोमवार का व्रत का महत्व तो है ही साथ ही इस महीने की मासिक शिवरात्रि भी अहम मानी जाती है। यह जानकारी पं. पूरन चंद्र जोशी ने गांधी नगर में सावन माह के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम के दौरान दी। उन्होंने बताया कि हिदू कैलेंडर के अनुसार सावन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन सावन शिवरात्रि मनाई जाती है। शिवरात्रि पर शिव भक्त पूरे दिन उपवास रखकर शिवजी की आराधना करते हैं। इस दिन शिवलिग पर गंगा जल से अभिषेक कर भगवान शिव को प्रसन्न किया जाता है। इस साल सावन शिवरात्रि छह अगस्त 2021 शुक्रवार को आ रही है।

सावन शिवरात्रि व्रत विधि

शिवपुराण में बताया गया है कि शिव भक्तों को मासिक शिवरात्रि पर उपवास और शिवलिग पर जलाभिषेक कर भोले भंडारी का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए। शिवरात्रि पर सुबह जल्दी स्नान करने के बाद पास के शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव की विधिवत आराधना करनी चाहिए। शिव पूजा में प्रयोग की जानी वाली सभी तरह की सामग्रियों को भोलेभंडारी को अर्पित करें। अगले दिन अपना व्रत तोड़कर शिव पूजा संपन्न की जाती है। भगवान शिव को भांग धतूरा ,बेलपत्र और गंगा जल अर्पित करें। इसीलिए जो इस माह में शिव पर गंगाजल चढाते हैं, वे देव तुल्य होकर जीवन मरण के बंधन से मुक्त हो जाते हैं। मानसिक परेशानी, कुंडली में अशुभ चन्द्र का दोष, मकान-वाहन का सुख और संतान से संबधित चिता शिव आराधना से दूर हो जाती है। इस माह में सर्पों को दूध पिलाने कालसर्प-दोष से मुक्ति मिलती है और उसके वंश का विस्तार होता है। ॐ नम: शिवाय करालं महाकाल कालं कृपालं ॐ नम: शिवायका जप करते हुए शिव आराधना करें। सावन शिवरात्रि का महत्व सावन शिवरात्रि पर भगवान शंकर पर जलाभिषेक किया जाता है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। शिव मंदिरों में विशेष पूजा-पाठ किया जाता है। गंगाजल से शिवलिग पर जलाभिषेक कर हर तरह की मनोकामना की पूर्ति के लिए भगवान शिव का आशीर्वाद लिया जाता है। मान्यता है जो भी शिवभक्त सावन शिवरात्रि पर भोलेनाथ का जलाभिषेक करता है उसकी सभी तरह की इच्छाएं जरूर पूरी होती है।

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