संवाद सूत्र, श्री मुक्तसर साहिब

शत्रुनाशिनी देवी मां बगलामुखी की साधना-उपासना से सभी तरह की परेशानियां दूर होती हैं। इनकी उपासना से मुकदमों में फंसे लोग, जमीन विवाद, शत्रुनाश आदि संपूर्ण मनोरथों की प्राप्ति होती है और भक्त का जीवन हर प्रकार की बाधा से मुक्त हो जाता है। हिदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को बगलामुखी जयंती मनाई जाती है। यह जानकारी पं. पूरन चंद्र जोशी ने गांधी नगर स्थित कार्यक्रम में प्रवचनों की अमृतवर्षा करते हुए दी।

उन्होंने कहा कि भगवान शिव द्वारा प्रकट की गई दस महाविद्याओं में प्रमुख आठवीं महाविद्या माता बगलामुखी देवी हैं। देवी बगलामुखी को बीर रति भी कहा जाता है क्योंकि देवी स्वयं ब्रह्मास्त्र रूपिणी हैं। तांत्रिक इन्हें स्तंभन की देवी मानते हैं। माता बगलामुखी के प्रमुख मंदिर भारत में मां बगलामुखी के तीन ही प्रमुख ऐतिहासिक मंदिर माने गए हैं जो क्रमश: दतिया (मध्य प्रदेश), कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) और नलखेड़ा (मध्य प्रदेश) में स्थित हैं।

कोरोना काल मे कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए सभी साधक घर पर ही रहकर देवी की आराधना करें। बगलामुखी जयंती पर माता बगलामुखी जी की विशेष कृपा पाने के लिए सर्वप्रथम पूजा वाले स्थान को गंगाजल से पहले पवित्र कर लें। उस स्थान पर एक चौकी रख उस पर माता बगलामुखी की मूर्ति/तस्वीर को स्थापित करें। पीले रंग के पुष्प से उनकी विधि-विधान से पूजा करें। मां बगलामुखी के वस्त्र एवं पूजन सामग्री प्रसाद, मौली आदि सभी पीले रंग के होते हैं। बगलामुखी मंत्र के जप के लिए भी हल्दी की माला का ही प्रयोग करें। भोग के रूप में बेसन के लड्डू चढ़ाएं। पीले वस्त्र धरण करें।

मंत्र का जप करते समय पवित्रता का विशेष ध्यान रखें। ब्रह्मचर्य का पालन करें। एक समय भोजन करें। मां बगलामुखी मंत्र मां बगलामुखी का 36 अक्षरों वाला मंत्र *ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्वां कीलय कीलय बुद्धि नाशय ह्लीं ॐ स्वाहा''। शत्रुनाशिनी देवी मां बगलामुखी देवी की साधना-उपासना से सभी तरह की परेशानियां दूर होती हैं।

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