संवाद सहयोगी, श्री मुक्तसर साहिब

बीते आठ माह से लटक रही हड्डारोड़ी की बोली आखिर मंगलवार को पूरी हो गई। बोलीकारों की आपसी खींचतान के कारण यह बोली बीते वर्ष के मुकाबले चार लाख 86 हजार रुपये महंगी हुई। बीते वर्ष जहां बोली तीन लाख 40 हजार रुपये थी वहीं इस वर्ष आठ लाख 26 हजार में यह बोली महिमा ¨सह के नाम टूटी। शहर की हड्डारोड़ी का ठेका सितंबर 2017 में समाप्त हो चुका था। जिसके बाद इसकी बोली नहीं हो पाई थी। चार बार बोली तो रखी गई लेकिन किसी न किसी कारण यह बोली नहीं हो पाई।

बोली में छह बोलीकार शामिल हुए थे। बोली बीते वर्ष के मुकाबले दस प्रतिशत बढ़ाकर तीन लाख 80 हजार से शुरू हुई। लेकिन धीरे-धीरे बोली पांच लाख तक जा पहुंची। पांच लाख के बाद सीधे ही एक बोलीकार ने सीधा छह लाख और बाद में छह लाख 51 हजार, फिर सात लाख, सात लाख से सात लाख 77 हजार और फिर सीधी 8 लाख 25 हजार पर जा बोली रुकी। इस दौरान ही एक बोलीकार महिमा ने आठ लाख 26 हजार बोली लगाई तो बोली उसके नाम ही टूट गई। यह वही महिमा है जिस पर करीब एक माह पहले बोली देने आते समय शहर के कुछ लोगों ने हमला कर दिया था। इस मौके पर नगर कौंसिल प्रधान हरपाल ¨सह बेदी, ईओ बिपिन कुमार, पार्षद पर¨मदर पाशा, राजबीर ¨सह बिट्टा गिल समेत अन्य नगर कौंसिल के कर्मचारी व बोलीकार मौजूद थे। आपस में हुई तल्खी

बोली के दौरान एक बार तो बोलीकारों मे तल्खी भी हो गई थी। एक बोलीकार ने तो यहां तक कह डाला कि इस बार ठेकेदार बदलना है और जट्टां तों मरे पशु चुकवाउंने आं। एक बार कुछ समय के लिए दो बोलीकार चुप हुए तो फिर से किसी ने बोला कि बस जट्ट मैदान छड्ड के भज्जगे। जिसके बाद कुछ आपस में तलखी भी हुई। लेकिन इओ व प्रधान ने दोनों पक्ष को चुप करवा दिया।

Posted By: Jagran

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