चेतन भूरा, मलोट (श्री मुक्तसर साहिब): गांव मलोट और ईनाखेड़ा के लगभग आठ हजार रकबे की फसलों को मलोट माइनर की खस्ता हालत होने के कारण पर्याप्त पानी न मिलने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनकी फसलें बर्बाद होने की कगार पर हैं। परंतु सरकार व संबंधित विभाग को इससे अवगत कराने के बावजूद समस्या का कोई हल नहीं किया जा रहा है।

यही स्थिति रही तो बंजर हो जाएंगी जमीनें

किसान पूर्व सरपंच अवतार सिंह, महांदीप सिंह ईनाखेड़ा, गुरमुख सिंह गिल आदि ने बताया कि मलोट माइनर से उनके रकबे को पानी पहुंचता है। लेकिन पिछले आठ सालों से पूरा पानी नहीं मिल रहा है। जिसके चलते उनकी फसलें सूख जाती हैं। अब नरमा की फसल सूख रही है। जमीनी पानी बहुत खराब है। यह पानी फसलों को दिया नहीं जा सकता। अगर यही स्थिति बनी रही तो उनकी जमीनें बंजर हो जाएंगी। नहरी विभाग की ओर से उनकी कोई सुनवाई नहीं की जा रही। जब भी बात की जाती है तो कहते हैं कि माइनर की हालत खस्ता है। जिसके कारण इसमें पानी कम छोड़ा जा रहा है। किसानों ने यह भी कहा कि उनकी ओर से खुद पैसे इकट्ठे करके माइनर की सफाई करवाई जाती है। लेकिन फिर भी जमीनों को पर्याप्त पानी नहीं पहुंचता। किसानों के अनुसार हालांकि नहरी विभाग की ओर से बताया जा रहा है कि इस माइनर के नवनिर्माण के लिए करीब नौ करोड़ रूपये का बजट बनाकर सरकार को भेजा गया है, लेकिन फंड जारी नहीं हो रहे हैं। क्षेत्र के विधायक अजायब सिंह भट्टी ने एक करोड़ रुपये माइनर के नवनिर्माण के लिए दिलाए हैं, लेकिन इतनी कम राशि से नवनिर्माण संभव नहीं है।

नवंबर में शुरू कर दिया जाएगा नवनिर्माण का काम

उधर, इस संबंध में जब नहरी विभाग के एक्सईएन रमनदीप सिंह बराड़ से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मलोट माइनर में पूरा पानी चल रहा है। माइनर की सफाई होने वाली है, जिसे आने वाले दिनों में करवा दिया जाएगा। जबकि माइनर के नवनिर्माण का काम भी नवंबर में शुरू कर दिया जाएगा।

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