संवाद सहयोगी, श्री मुक्तसर साहिब : कार्तिक शुक्ल पक्ष अष्टमी को गोपाष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गो चारण लीला शुरू की थी। गाय को गोमाता भी कहा जाता है। इस दिन गायों को खूब सजाया जाता है। इसके बाद गाय को चारा आदि डालकर परिक्रमा करते हैं। परिक्रमा करने के बाद कुछ दूर तक गायों के साथ चलते हैं। ऐसी आस्था है कि गोपाष्टमी के दिन गाय के नीचे से निकलने वालों को बड़ा पुण्य मिलता है। ये विचार आज मुक्तसर की भुल्लर कालोनी मे स्थित मां चितपूर्णी मंदिर में गोपाष्टमी से एक दिन पूर्व संध्या पर पं. पूरन चंद्र जोशी ने समूह श्रद्धालुओं के समक्ष प्रगट किये। पं.जोशी ने कहा कि गृहस्थी लोगो को अपने कल्याण के लिए गो सेवा करनी चाहिए। इस अवसर पर गौशाला के अध्यक्ष श्री अमृत लाल खुराना, दीप चंद, पं. केदारनाथ शर्मा कान्यावाली, प्रदीप शर्मा सादिक, मदन शर्मा बीरेवाला आदि श्रद्धालु उपस्थित थे।

Posted By: Jagran

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