संवाद सूत्र, श्री मुक्तसर साहिब : भारतीय किसान यूनियन एकता उग्राहां की तरफ से डीसी दफ्तर के समक्ष शुरू किया गया धरना वीरवार को 11वें दिन भी जारी रहा। धरने के दौरान किसानों ने चन्नी सरकार के विरुद्ध नारेबाजी की। मांगों को लेकर किसानों ने डीसी दफ्तर के समक्ष पक्का धरना लगाया हुआ है। इस दौरान जिला प्रधान पूरन सिंह दोदा, महासचिव गुरभगत सिंह भलाईआना, भुपिदर सिंह, गुरपाश सिंह, सुखदेव सिंह, हरफूल सिंह, मनोहर सिंह, मनप्रीत सिंह आदि ने कहा कि खेती कानूनों के खिलाफ किसानी आंदोलन की जीत बाद जत्थेबंदी ने पहले ही एलान किया था कि अब पंजाब की चन्नी सरकार की तरफ रुख किया जाएगा। नेताओं ने बताया कि चन्नी सरकार ने 16 दिसंबर की किसानों के साथ चंडीगढ़ में बैठक मुलतवी करना वादा खिलाफी है। उन्होंने कहा कि गुलाबी सूंडी के साथ हुई नरमे की तबाही और गड़ेमारी के साथ धान और दूसरे फसलों की बर्बादी का 1700 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए, 10 प्रतिशत खेत मजदूरों को तुरंत अदा करने, खुदकुशी पीड़ित किसानों, मजदूर के परिवारों को सरकार की तरफ से रखा तीन तीन लाख रुपये आर्थिक सहायता, लोगों को तुरंत सरकारी नौकरी पर सारा कर्ज खत्म करने, किसानी आंदोलन में शहीद किसानों के परिवारों को 5-5 लाख सहायता राशि और सरकारी नौकरी दी जाए। इसके अलावा नेताओं ने मांग की कि किसानी आंदोलन के दौरान किसानों पर हुए पर्चे रद कर किए जाएं, पर बैंक के पास किसानों के पड़े खाली चेक वापस करवाए जाएं, नशों का खात्मा किया जाए, एनएचएम इंप्लाइज यूनियन पंजाब के कच्चे मुलाजिमों को पक्का किया जाए आदि मांगों न मानी जाने पर पक्के और तीव्र संघर्ष की चेतावनी दी गई है। नेताओं ने मानसा में अध्यापकों पर हुए लाठीचार्ज की निदा की और आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस मौके पर खेत मजदूर यूनियन के जिला समिति मेंबर काका सिंह खूंडेहलाला, मेजर सिंह गिल्लजेवाला, अजायब सिंह, हरपाल सिंह धूड़कोट और गांवों के प्रधान सचिव शामिल थे।

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