रणजीत गिल्ल, दोदा (श्री मुक्तसर साहिब) : पराली प्रबंधन के लिए चलाई जा रही योजनाओं का लाभ लेते हुए इस बार अधिकतर किसानों ने पराली को आग लगाने से किनारा किया है। वहीं पर ही जिले की हदूद पर स्थित बठिंडा जिले के गांव जंगीराणा का निवासी बीटेक पास करणबीर सिंह पराली प्रबंधन में बीते दो वर्ष से अहम योगदान दे रहा है। हालांकि वह बीते लंबे समय से पराली को आग नहीं लगा रहा है। लेकिन पहले वह कुछ हिस्से को आग लगाता था। जबकि बीते दो वर्ष से उन्होंने बिल्कुल ही पराली को आग नहीं लगाई है।

करनबीर सिंह ने बताया कि जब से वह बीटेक करे लगा था तब से ही वह पराली को आग नहीं लगाते थे। पहले वह खेत में बीच के कर्चे को आग लगा देते थे। पहले उनके पास कोई साधन नहीं थे जिससे वह पराली का प्रबंधन कर सकें। लेकिन फिर भी वह आग लगाने से गुरेज करते थे। इस बार उन्होंने सब्सिडी पर चौपर की खरीद की है। अब तक उन्होंने पांच एकड़ गेहूं की बिजाई कर दी है। बाकी की भी जल्द ही कर देंगे। करनबीर के अनुसार कुछ किसान सोचते हैं कि पराली बीच में दबाने से गेहूं की पैदावार कम होती है। लेकिन ऐसा नहीं है, बल्कि इस बार जो पराली जमीन में दबा दी है अगले वर्ष जब जमीन जोती जाएगी तो वही पराली खाद बनकर उपर आ जाएगी। जिससे फसल की पैदावार बढ़ेगी। इसलिए पर्यावरण को बचाने के लिए सभी को एकजुट होकर पराली को आग लगाने से गुरेज करना चाहिए। जहां तक साधन है उतना तो सभी को चाहिए। ताकि पर्यावरण को बचाया जा सके।

Posted By: Jagran

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप

ਪੰਜਾਬੀ ਵਿਚ ਖ਼ਬਰਾਂ ਪੜ੍ਹਨ ਲਈ ਇੱਥੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ!