संवाद सहयोगी, मोगा : विभागीय नियमों के तहत मैरिट के आधार पर ठेके पर भर्ती हुए एसएसए. रमसा अध्यापकों को दस वर्षो के बाद वेतन पर 75 प्रतिशत कटौती करके शिक्षा विभाग में रेगुलर करने के लिए लिए जा रहे फैसले के विरोध में प्रदेश स्तरीय फैसले तहत एसएसए. रमसा अध्यापकों ने अपनी स्कूल डयूटी दौरान काले बिल्ले लगाकर सरकार खिलाफ रोष जाहिर किया। ऐसे हालातों में उनके लिए किसी अध्यापक दिवस का महत्व नहीं रह जाता। अंत में अध्यापक नेताओं ने सरकार से मांग की कि अगर वह सचमुच अध्यापकों के सम्मान को बहाल करना चाहते हैं तो समूचे कच्चे अध्यापकों के साथ-साथ समूह एसएसए. रमसा अध्यापकों को पूरा वेतन पर विभागीय लाभों समेत शिक्षा विभाग में रेगुलर किया जाए। आर्थिक शोषण का शिकार अध्यापक

इस दौरान अध्यापक जजपाल बाजेके, गुरप्रीत अमीवाला और नवदीप बाजवा ने कहा कि जहां पिछले चार महीनों से वह अपने वेतन को तरस रहे है, वहीं पंजाब सरकार एसएसए रमसा अध्यापकों के वेतन कम करके एक दिहाड़ीदार मजदूर जितनी कर रही है। ऐसे आर्थिक शोषण का शिकार होने जा रहे एसएसए रमसा अध्यापक पहले ही पिछले पांच वर्ष से झूठे पुलिस केसों की तारीख भुगत कर मानसिक व सामाजिक तौर पर परेशान हो रहे हैं।

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