राज कुमार राजू,मोगा

स्थानीय बस स्टैंड पर बुधवार को दूसरे दिन भी पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी कांट्रैक्ट वर्कर यूनियन के आह्वान पर हड़ताल जारी रही। कांट्रैक्ट कर्मचारियों ने रेगुलर करने की मांग को लेकर पंजाब सरकार और ट्रांसपोर्ट मंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। वहीं, हड़ताल के कारण महिलाओं को मजबूर निजी बसों में सफर करना पड़ा और आधार कार्ड होने के बावजूद पूरा किराया देना पड़ा। इसे महिलाओं ने पंजाब सरकार के खिलाफ रोष व्यक्त किया। हड़ताल के कारण निजी बस आपरेटरों की चांदी रही।

वादा पूरा नहीं किया गया

धरने को संबोधित करते हुए यूनियन नेता सूबा सिंह,बलजिदर सिंह, गुरप्रीत सिंह ने कहा कि पिछले कई वर्षों से आउटसोर्सिंग व कांट्रैक्ट बेस पर काम कर रहे कर्मचारियों को रेगुलर करने का 14 सितंबर को कैप्टन अमरिदर सिंह ने वादा किया था। कैप्टन ने कहा था कि जो कर्मी तीन वर्ष से काम कर रहे हैं, उन्हें रेगुलर किया जाएगा। लेकिन कांग्रेस पार्टी के आपसी कलह के कारण मुख्यमंत्री व ट्रांसपोर्ट मंत्री बदल गए। नए मुख्यमंत्री व ट्रांसपोर्ट मंत्री ने भी यूनियन के साथ बैठक में तो उनकी मांग को तो मान लिया, लेकिन आज तक किसी भी कर्मी को रेगुलर नहीं किया। एक दिसंबर को हुई कैबिनेट की बैठक में आपसी घमासान के बाद यूनियन की मांगों को अनदेखा किया गया। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी द्वारा जिन कर्मियों को रेगुलर करने की घोषणा की है उनमें से कापोर्रेशन व बोर्ड के कर्मियों को बाहर रखा गया है। उनकी मांग फिर अधर में लटक गई है। इसलिए पंजाब के सभी डिपुओं पर पनबस कर्मी हड़ताल पर बैठे हुए हैं। 200 कर्मचारी हैं हड़ताल पर, 94 बसें अड्डे में खड़ीं

सूबा सिंह ने बताया कि मोगा बस स्टैंड में 200 के करीब ड्राइवर व कंडक्टर हैं जो कांट्रैंक्ट बेस पर काम कर रहे हैं। जबकि 43 बड़ी तथा पांच मिनी बसों सहित 48 बसें पनबस की रोजाना अलग-अलग रूट के लिए मोगा बस स्टैंड से चलती हैं जो दो दिनों से बस स्टैंड पर खड़ी हैं। ऐसे में रोजाना आठ लाख रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। इस बार लोग झूठे वादों के झांसे में नहीं आएंगे

धरने के दौरान यूनियन के नेता लखबीर सिंह ने कहा कि राज्य सरकार ने विधानसभा 2017 चुनाव से पहले वादा किया था कि उनकी सरकार बनते ही कच्चे कर्मियों व आउटसोर्स कर्मियों को रेगुलर किया जाएगा। अब फिर से चुनाव नजदीक है व सरकार के मंत्री व विधायक बड़े-बड़े वादे कर रहे है लेकिन इस बार लोग सरकार के झूठे वादों में नहीं आएंगे । फ्री के बजाय पूरा किराया देकर किया सफर

गांव बोडे से मोगा आने वाली 60 वर्षीय गुरदेव कौर व 65 वर्षीय तेज कौर ने बताया कि वह मोगा के गांव लोहारा में एक शोक समागम में भाग लेने के लिए आई हैं। पूर्व में जब जब भी सफर किया तो आधार कार्ड पर फ्री में सफर किया। बुधवार को हड़ताल के कारण मोगा पहुंचने के दौरान उनके करीब सवा सौ रुपये खर्च हो गए।

निजी बसों में नही है फ्री में सफर करने की सुविधा:

मोगा के बस स्टैंड पर बुधवार को दूसरे दिन कांट्रैक्ट वर्करों ने हड़ताल कर बसों की आवाजाही बंद की हुई थी। वहीं निजी बसों व रोडवेज की 22 बसें चलती रहीं। रोडवेज की बसों की संख्या कम तथा यात्रियों की गिनती ज्यादा होने से निजी बसों में सफर करने वाले यात्रियों की गिनती ज्यादा थी। निजी बसों के परिचालकों ने आधार कार्ड होने के बावजूद महिलाओं से पूरा किराया वसूला।

Edited By: Jagran