जेएनएन, मोगा। आर्ट आफ लिविंग के प्रणेता श्री श्री रविशंकर ने आइएसएफ कॉलेज आफ फार्मेसी के कन्वोकेशन में बच्चों को जीवन की सफलता के साथ राष्ट्र की प्रगति और उन्नति का मार्ग दिखा गए। श्री श्री रविशंकर जी ने इस मौके पर संबोधित करते हुए कहा यूनिवर्सिटी या रिसर्च कॉलेज में पढ़ते हुए महज कुछ ज्ञान हासिल करके चले जाना शिक्षा का असल उद्देश्य नहीं है। शिक्षा तभी सार्थक है जब शिक्षा देश की समस्याओं के समाधान के काम आए, देश में खुशहाली लाने का कारण बने।

श्री श्री रविशंकर ने कहा कि ये काम यहां से निकलने वाले विद्यार्थी ही कर सकते हैं। जो आज यहां से डिग्रियां लेकर समाज के दूसरे क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत का नागरिक दुनिया के काम आ सकता है। देश में आज नशा बड़ी चिंता का विषय है। विदेश में जाकर जब यहां के युवा नशे के कारण वापस लौटते हैं ये शर्म का विषय है। हमें पूरे समाज के सहयोग से नशारूपी बुराई से बाहर आना होगा और देश की उन्नति के लिए काम करना होगा।

श्री श्री रविशंकर ने कहा कि दुनिया से हम बहुत सारे अच्छे गुण ले सकते हैं। जापान से टीम वर्क सीख सकते हैं, जर्मन से दोषमुक्त प्रोडक्ट बनाना सीख सकते हैं, अमेरिका से मार्केटिंग टेक्निक सीख सकते हैं, ब्रिटिश से सभ्यता और सभ्यता सीख सकते हैं। भारत से मानवीयता सीखी जा सकती है। सबको अपना बना लेना भारत की सबसे बड़ी कला है जो सिर्फ भारत में ही मिलती हैं। गंभीर समस्याओं और चुनौतियों के बीच भी यहां के लोग अपने लिए खुशियां तलाश लेते हैं। दुनिया के दूसरे देशों में यह सब नहीं होता है। यही कला हमारे देश के नौजवानों को दुनिया के सारे देशों को सिखानी है। सारी दुनिया को अपना बना लेना है तभी शिक्षा सार्थक है।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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