संवाद सहयोगी, मोगा

प्राचीन श्री सनातन धर्म शिव मंदिर में आयोजित श्री शिव महापुराण की कथा में प्रवचन करते हुए कथावाचक पंडित पवन गौतम ने कहा कि प्राणी सुख की प्राप्ति के लिए दर-दर भटकता रहता है।

उन्होंने कहा कि मनुष्य कभी पूजा पाठ में सुख ढूंढता है, कभी संत महात्माओं के चरणों में, कभी तथाकथित गुरुओं की शरण में जाता है लेकिन कहीं से भी उसे सुख एवं शांति की प्राप्ति नहीं होती। क्योंकि आज का प्राणी अपने स्वार्थ के कारण एवं क्षणिक सुखों की प्राप्ति के लिए सबसे बड़े देवता- तीर्थ व गुरु का अनादर कर रहा है। शास्त्रों के अनुसार माता एवं पिता से बढ़कर कोई भी नहीं है। माता- पिता की आज्ञा का पालन एवं सेवा से सभी सुख एवं सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है। अगर जन्म देने वाले माता-पिता प्रसन्न नहीं हैं तो कोई भी गुरु या पूजा- पाठ प्राणी का कल्याण नहीं कर सकता है। कथा का वर्णन करते हुए पंडित पवन गौतम ने कहा कि माता पार्वती एवं भगवान शिव ने जब अपने पुत्रों गणेश जी व स्वामी कार्तिकेय की शादी का विचार करके दोनों पुत्रों को समस्त तीर्थों की परिक्रमा करने की आज्ञा देते हैं। कहते हैं कि दोनों पुत्रों में से जो भी पहले पृथ्वी की परिक्रमा करके आएगा उसका विवाह रिद्धि और सिद्धि से कर दिया जाएगा। स्वामी कार्तिक यात्रा को चले गए लेकिन गणेश जी ने माता-पिता की पूजा के बाद उनकी परिक्रमा की और प्रार्थना की। सब शास्त्रों के अनुसार कि माता-पिता के शरीर में सभी देवता एवं चरणों में समस्त तीर्थों का वास होता है

पंडित जी ने आगे कहा कि जो संस्कार, शिष्टता, विचार, ज्ञान और सद्बुद्धि हमें माता-पिता से मिल सकती है, वह अन्य किसी भी देवी-देवता या साधु-संतों से भी नहीं मिल सकते। माता-पिता से बढ़कर कोई देवता नहीं है। इसलिए प्राणी को अपने माता-पिता की सेवा करनी चाहिए। इस अवसर पर आशा सिगला, इंद्रा गर्ग, रीटा मित्तल, किरण गर्ग, जतिन मुरली ने भजनों द्वारा भगवान शिव का गुणगान किया। मंदिर कमेटी की ओर से पवन कुमार गोयल,देवेंद्र गुप्ता,अशोक बंसल, रविदर गर्ग आदि ने कथा में भाग लेकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया।

Edited By: Jagran