नशा छोड़ा तो हर महीने मिलेंगे 1100 रुपये, मोगा के रण सिंह कलां गांव का मॉडल पूरे पंजाब के लिए बना मिसाल
मोगा का रण सिंह कला गांव सामूहिक प्रयासों से नशामुक्त मॉडल बन गया है, जहां पंचायत, महिलाएं और युवा मिलकर नशे के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं।
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मोगा का रण सिंह कला गांव बना नशामुक्त मॉडल, पूरे पंजाब के लिए प्रेरणा।
HighLights
गांव ने सामूहिक प्रयास से 85 युवाओं को नशामुक्त किया
नशा छोड़ने वालों को मासिक वित्तीय सहायता और पुस्तकालय सुविधा
शराब ठेका हटाया, एनर्जी ड्रिंक पर भी प्रतिबंध लगाया गया
राजेश त्रिपाठी, मोगा। पंजाब में नशे की चुनौती लगातार गंभीर होती जा रही है, लेकिन मोगा जिले का रण सिंह कला गांव यह साबित कर रहा है कि यदि पूरा समाज एक लक्ष्य के लिए खड़ा हो जाए तो सबसे कठिन लड़ाई भी जीती जा सकती है।
करीब 600 परिवारों के 3200 आबादी वाले इस गांव ने नशे के खिलाफ अभियान ही नहीं चलाया, सामूहिक संकल्प को सामाजिक आंदोलन का रूप भी दिया। यही कारण है कि पंचायत, महिलाओं, युवाओं, प्रशासन ने मिलकर गांव को नशामुक्ति का मॉडल बना दिया है।
गांव के सरपंच प्रीत इंद्रपाल सिंह (मिंटू सरपंच) बताते हैं कि करीब एक वर्ष पहले उन्होंने महसूस किया कि केवल पुलिस कार्रवाई या सरकारी योजनाओं के भरोसे नशे की समस्या समाप्त नहीं होगी। इसके लिए पूरे गांव को साथ लाना जरूरी है। सबसे पहले लोगों के साथ बैठकों का दौर शुरू किया।
परिवारों से संवाद किया और यह संदेश दिया कि नशे के खिलाफ लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं, पूरे गांव की जिम्मेदारी है। पंचायत ने गांव में अस्पताल की व्यवस्था कर चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई। बाद में नशा पीड़ित युवकों को विशेषज्ञ डाक्टरों के पास भेजकर उनका उपचार शुरू कराया गया।

पिछले एक वर्ष में 85 युवकों का इलाज कराया गया। उपचार के बाद उनकी शारीरिक कमजोरी दूर करने के लिए पंचायत प्रति महीने 1100 रुपये की सहायता देती है, ताकि वे पौष्टिक आहार लेकर सामान्य जीवन में लौट सकें। इससे युवाओं का आत्मविश्वास भी बढ़ा और दोबारा नशे की ओर लौटने की आशंका कम हुई।
युवाओं को यह राशित तब तक मिलती है, जब तक वह पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो जाते। इसका फैसला इलाज करने वाले डाक्टर करते हैं। अभियान को सफल बनाने में महिलाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। परिवारों की माताओं और बहनों ने नशे से जूझ रहे सदस्यों को उपचार के लिए प्रेरित किया। उनकी निगरानी की और घर का माहौल सकारात्मक बनाया। वहीं, युवाओं ने नशा छोड़ने वालों का मनोबल बढ़ाया और उन्हें सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने का काम किया।
एनर्जी ड्रिंक तक नहीं बिकने दी जाती
गांव ने केवल इलाज तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि नशे की उपलब्धता पर भी सख्ती से रोक लगाई। गांव से शराब का ठेका हटाया गया और किराना व जनरल स्टोरों पर एनर्जी ड्रिंक तक नहीं बिकने दी जाती। पंचायत स्वयं इन नियमों का पालन कराती है और ग्रामीण भी इसमें पूरा सहयोग देते हैं।

नशामुक्त परिवारों को 11 हजार रुपये का सम्मान देकर गांव ने सकारात्मक प्रतिस्पर्धा का वातावरण तैयार किया। इस गांव में 32 परिवार नशे से जुड़े रहे, जो नशामुक्त होकर इस सम्मान से सम्मानित हो चुके हैं।
रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ने को खोला पुस्तकालय
नशा छोड़ चुके लोगों का जीवन फिर से सही दिशा में बना रहे, इसके लिए गांव में पुस्तकालय भी स्थापित किया गया है। यहां युवा समय बिताते हैं, पढ़ते हैं और रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ते हैं। गांव की विकास समिति लोगों के सहयोग और दान से अभियान के लिए धन जुटाती है, जिससे उपचार, पोषण सहायता और अन्य गतिविधियां संचालित होती हैं।

राज्यपाल व केंद्रीय मंत्री भी कर चुके सराहना
सरपंच प्रीत इंद्रपाल सिंह कहते हैं कि रण सिंह कला के इस मॉडल की चर्चा अब दूसरे गांवों तक पहुंच चुकी है। विभिन्न क्षेत्रों से लोग यहां आकर इस पहल की पंचायत से जानकारी लेते हैं।पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान गांव की इस पहल की सराहना कर चुके हैं। चौहान ने तो सरपंच को दिल्ली में इस मडल की प्रस्तुति देने का भी सुझाव भी दिया।
