सत्येन ओझा, मोगा

नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन को दरकिनार पर दवाओं के पर नाम पर देश में संचालित हो रहे बड़े स्कैंडल पर एम्स भोपाल के अध्यक्ष डॉ. वाइके गुप्ता ने गहरी चिंता जताई है। डॉ. गुप्ता ने भारत सरकार से अपील की है कि कुछ दवाओं पर डॉक्टरों के प्रिसक्रिप्शन को सब्स्टीट्यूट करने का कानूनी अधिकार फार्मासिस्ट को मिले। साथ ही फार्मासिस्ट को भी चेताया कि सब्स्टीट्यूट का अधिकार तभी सही साबित होगा, जब फार्मासिस्ट इस अधिकार को ईमानदारी से देश के आम आदमी को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रयोग करें। डॉ. गुप्ता शुक्रवार को आइएसएफ कॉलेज ऑफ फार्मेसी में सेफ एंड इफेक्टिव मेडिसिन विषय पर शुरू हुई दो दिवसीय नेशनल कांफ्रेंस के उद्घाटन के मौके पर संबोधित कर रहे थे।

गौर हो कि केंद्र सरकार द्वारा देश के आम आदमी को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए डेढ़ साल पहले बनाई गई कमेटी के सदस्यों से भी डॉ. गुप्ता ने पुरजोर सिफारिश की थी कि कुछ दवाओं पर फार्मासिस्ट को सब्स्टीट्यूट का अधिकार दिया जाए। डॉ. गुप्ता ने स्पष्ट तौर पर कहा कि आज पूरे देश में चिकित्सकों व दवा कंपनियों का एक गठजोड़ बना हुआ है, जो नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल दवाओं से बाहर जाकर महंगी ब्रांडेड कंपनियों की दवाएं मरीजों को लिख रहे हैं। चिकित्सक अगर नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन के अनुसार दवाएं लिखना शुरू कर दें, तो सरकार देश के हर व्यक्ति को सस्ती से सस्ती दवाएं उपलब्ध करा सकती हैं। वर्तमान में तो स्थिति यह है कि चिकित्सक वो दवाएं लिखता हैं, जिस पर उसे कुछ मिलता है। इसके लिए दवा की दुकानें भी तय होती हैं। मरीज तय दुकान पर नहीं जाता है, तो उसे एक दुकान से दूसरी दुकान पर भटकना पड़ता है। ये सब बंद होना चाहिए।

डॉ. वाइके गुप्ता ने दवाओं के सब्स्टीट्यूट के कानूनी अधिकार को लेकर फार्मासिस्ट को भी चेतावनी दी कि उनकी सिफारिश का यह मतलब कतई नहीं होना चाहिए कि अभी तक जो कुछ डॉक्टरों की जेब में जा रहा है, सब्स्टीट्यूट करने का अधिकार मिलते ही वह फार्मासिस्ट की जेब में जाने लगे। इसका उद्देश्य मरीज को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराना हो, तभी इस सिफारिश का असल मकसद कामयाब होगा।

Posted By: Jagran

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