सत्येन ओझा,मोगा

सरकार ने वन टाइम सेलमेंट स्कीम 2021 को लांच कर सूबे के बड़ी संख्या में व्यापारियों को लाभ पहुंचाने का दावा किया है। उधर टैक्सेशन प्रोफेशनल का कहना है कि इस स्कीम पर वाहवाही लूटने के लिए मुख्यमंत्री ने जितना खर्च प्रचार पर कर डाला है, इसका लाभ व्यापारियों को नहीं होना है। कारोबारियों के पुराने बकाया क्लेम सेटल करने की जो सीमा एक लाख रुपये की तय की है, प्रोफेशनल्स के अनुसार ऐसे केस को पांच प्रतिशत भी नहीं है, मोगा शहर में तो इसकी संख्या और भी कम है, अगर केस सेटल करने की सीमा पांच या दस लाख रुपये होती तो इसका फायदा व्यापारी को भी होता और सरकार का भी खजाना भरता।

टैक्सेशन बार के एडवोकेट वरिदर अरोड़ा का कहना है कि जीएसटी स्टेट एक लाख तक के क्लेम की रिकवरी तो निकालता ही नहीं है, बहुत कम मामलों में ऐसा होता है जब एक लाख तक के क्लेम होंगे। मोगा में तो ऐसे केस पांच प्रतिशत भी नहीं है। क्योंकि छोटी रकम को तो व्यापारी खुद ही विभाग में चक्कर लगाने के बजाय क्लेम जमाकर सेटल कर लेता है। मामला पांच लाख, दस लाख में केस पर जाता है। सरकार ने इस योजना के प्रचार पर करोड़ों रुपये खर्च कर लिए लेकिन उसका लाभ न तो कारोबारियों को होगा न ही सरकार का खजाना भरेगा, क्योंकि केस सेटल होंगे तभी सरकारी खजाने में राशि जाएगी।

एडवोकेट गौरव कंसल के अनुसार भी सरकार को अगर वास्तव में व्यापारी को लाभ देना है और सरकार का खजाना भरना है तो कम से कम 10 लाख रुपये की सीमा रखते भले ही सेटलमेंट की राशि 10 प्रतिशत की बजाय 20 प्रतिशत कर देते, 25 प्रतिशत कर देते, वो व्यापारियों के लिए भी लाभकारी होता, सरकार का खजाना भी भरता।

वरिष्ठ सीए प्रेम सिगला का कहना है कि सरकार जितना दावा कर रही है लोगों को फायदा देने का उतना फायदा होगा नहीं। क्योंकि एक लाख तक के क्लेम केस ही बहुत कम हैं। यह है स्कीम

पंजाब सरकार ने पुराने स्टेट जीएसटी केस सेटल करने के लिए एक योजना लांच की है कि जिनके एक लाख तक की रिकवरी के केस किसी भी स्तर पर चल रहे हैं तो वे कुल रिकवरी केस की राशि का 10 प्रतिशत राशि जमा कराकर केस को सेटल कर सकते हैं।

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