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पंजाब: मोगा सिविल अस्पताल में शवों के भी लगते हैं दाम, बिहार ले जाने के लिए 50000 तक की मांग; RTO विभाग पर उठे सवाल

By Rajkumar RajuEdited By: Prince Sharma
Published: Sat, 15 Aug 2026 02:49 PM (IST)

मोगा सिविल अस्पताल में निजी एंबुलेंस संचालक मृतकों के परिजनों से शव ले जाने के लिए मनमाना किराया वसूल रहे हैं।

मोगा सिविल अस्पताल में शवों के भी लगते हैं दाम (फाइल फोटो)

मोगा सिविल अस्पताल में शवों के भी लगते हैं दाम (फाइल फोटो)


HighLights

  1. निजी एंबुलेंस संचालक वसूल रहे मनमाना किराया।

  2. बिहार शव ले जाने को मांगे 50,000 रुपये।

  3. आरटीओ विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल।

राजकुमार राजू, मोगा। मथुरादास सिविल अस्पताल में मरीजों और मृतकों के परिजनों की मजबूरी का फायदा उठाए जाने का मामला सामने आया है। अस्पताल परिसर में दिनभर निजी एंबुलेंस संचालकों का जमावड़ा लगा रहता है।

शुक्रवार को बिहार निवासी एक युवक का शव उसके पैतृक गांव ले जाने के लिए निजी एंबुलेंस का किराया तय करने को लेकर दो संचालक आपस में बहस करने लगे। एक संचालक ने शव बिहार पहुंचाने के लिए 50 हजार रुपये, जबकि दूसरे ने 40 हजार रुपये की मांग की। इतनी बड़ी राशि सुनकर मृतक के परिजनों में रोष पैदा हो गया।

हादसे में हुई थी मजदूर की मौत

जानकारी के अनुसार शुक्रवार को मोगा-अमृतसर रोड पर दमकल विभाग की गाड़ी की चपेट में आने से मोटरसाइकिल सवार दो मजदूर घायल हो गए थे। हादसे में बिहार निवासी बिट्टू कुमार गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसे उपचार के लिए मोगा के सिविल अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अस्पताल प्रशासन ने मामले की सूचना पुलिस को दी।

पुलिस ने दमकल विभाग की गाड़ी के चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। इसके बाद मृतक के शव का पोस्टमार्टम करवाया गया। परिवार की ओर से शव को बिहार के जिला लखीसराय के गांव दामोदरपुर ले जाने की तैयारी की जा रही थी।

किराये को लेकर अस्पताल में होने लगी बहस

शव को बिहार ले जाने के लिए निजी एंबुलेंस की जरूरत पड़ी तो दो संचालकों के बीच किराये को लेकर बहस शुरू हो गई। बताया जा रहा है कि एक एंबुलेंस संचालक ने 50 हजार रुपये और दूसरे ने 40 हजार रुपये की मांग की।

मृतक के परिवार के लिए इतनी बड़ी रकम जुटाना मुश्किल था। परिजनों ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि परिवार पहले ही हादसे में अपने सदस्य को खो चुका है और अब शव घर ले जाने के लिए भी इतनी बड़ी रकम मांगी जा रही है।

अस्पताल परिसर में दिनभर रहता है जमावड़ा

स्थानीय लोगों का आरोप है कि सिविल अस्पताल परिसर में निजी एंबुलेंस संचालकों का दिनभर जमावड़ा रहता है। मरीज या मृतक के परिजन जैसे ही अस्पताल से बाहर निकलते हैं, उन्हें एंबुलेंस उपलब्ध करवाने के नाम पर अलग-अलग किराये बताए जाते हैं। गंभीर परिस्थितियों में परिजनों के पास मोलभाव करने का विकल्प भी कम रह जाता है।

कई चालकों के पास लाइसेंस नहीं होने का आरोप

लोगों का यह भी आरोप है कि अस्पताल में खड़ी ज्यादातर निजी एंबुलेंस के चालकों के पास आवश्यक लाइसेंस या दस्तावेज नहीं हैं। इसके बावजूद इन वाहनों का संचालन किस प्रकार हो रहा है, इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि संबंधित विभाग को समय-समय पर एंबुलेंस और चालकों के दस्तावेजों की जांच करनी चाहिए।

आरटीओ विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल

निजी एंबुलेंस संचालकों की मनमानी और बिना आवश्यक दस्तावेजों के वाहन चलाने के आरोपों के बावजूद कार्रवाई न होने से आरटीओ विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।

लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सिविल अस्पताल में संचालित निजी एंबुलेंस की जांच करवाई जाए और किराये की दरें सार्वजनिक की जाएं, ताकि मरीजों और मृतकों के परिजनों से उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर मनमाने पैसे न वसूले जा सकें।