झोटा हत्याकांड के बाद मोगा में मेडिकल नशा बेचने वालों में हड़कंप, कई दुकानें बंद
मानसा में परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद मोगा में मेडिकल नशे के कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। ...और पढ़ें

परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद पंजाब में नशे के कारोबार का मुद्दा चर्चा में है।
HighLights
झोटा हत्याकांड के बाद मोगा में नशा कारोबारियों में हड़कंप
पुलिस कार्रवाई से डरकर कई मेडिकल दुकानें बंद हुईं
बिना पर्ची दवा बेचने वाले दुकानदार भूमिगत हुए
संवाद सहयोगी, मोगा। मानसा में परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद पंजाब में नशे के कारोबार का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। इस हत्याकांड के बाद नशा तस्करों और कथित तौर पर मेडिकल नशे के रूप में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां बेचने वालों में हड़कंप मचा हुआ है।
मोगा में भी पुलिस की कार्रवाई को देखते हुए शहर के विभिन्न हिस्सों में ऐसी दवाइयां बेचने के आरोपों का सामना कर रहे कई दुकानदारों के भूमिगत होने और दुकानें बंद होने की चर्चा है।
बताया जा रहा है कि मोगा में कैंप कपड़ा मार्केट, सरदार नगर, अकालसर रोड, पहाड़ा सिंह चौक, बहोना चौक, चुंगी नंबर तीन और लाल सिंह रोड समेत कई अन्य स्थानों पर नशे के रूप में इस्तेमाल होने वाली दवाइयों की बिक्री की शिकायतें सामने आती रही हैं।
स्थानीय स्तर पर चर्चा के अनुसार, इन स्थानों पर सुबह और शाम के समय ऐसी दवाइयां लेने वालों की आवाजाही देखी जाती थी। आरोप हैं कि कुछ लोग डॉक्टर की पर्ची के बिना ही दवाइयां हासिल कर लेते थे।
परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड के बाद पुलिस की सख्ती बढ़ने से इन गतिविधियों पर असर पड़ने की बात कही जा रही है। जिन दुकानों पर पहले लोगों की आवाजाही दिखाई देती थी, उनमें से कुछ के बंद होने की सूचना है। हालांकि, इन दुकानों पर प्रतिबंधित दवाइयों की बिक्री और पुलिस कार्रवाई के संबंध में आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
मेडिकल नशे की बिक्री पर निगरानी जरूरी
शहरवासियों का मानना है कि मेडिकल नशे के अवैध कारोबार पर रोक लगाने के लिए पुलिस और ड्रग विभाग को संयुक्त रूप से जांच अभियान चलाना चाहिए। संदिग्ध मेडिकल स्टोरों के रिकॉर्ड, दवाइयों की खरीद-बिक्री और डॉक्टरों की पर्चियों की जांच की जानी चाहिए। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
नशे के खिलाफ कार्रवाई केवल कुछ दिनों तक सीमित रहने के बजाय लगातार जारी रहनी चाहिए, ताकि युवाओं को नशे की गिरफ्त में जाने से बचाया जा सके और अवैध रूप से दवाइयां बेचने वालों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
