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72 घंटे में बनकर तैयार हुआ परविंदर झोटा का स्टेच्यू, मोगा के कलाकार ने 60 हजार खर्च कर दी अनोखी श्रद्धांजलि

By Rajkumar RajuEdited By: Nitish Kumar Kushwaha
Published: Wed, 21 Oct 2026 05:29 PM (IST)

मोगा के इकबाल सिंह ने मानसा में नशे के खिलाफ जान गंवाने वाले परमिंदर सिंह झोटा की प्रतिमा बनाई है।

72 घंटे की मेहनत से बनाया परविदर सिंह झोटा का स्टेच्यू, नशे के खिलाफ जंग लड़ने का दिया संदेश।

72 घंटे की मेहनत से बनाया परविदर सिंह झोटा का स्टेच्यू, नशे के खिलाफ जंग लड़ने का दिया संदेश।

HighLights

  1. इकबाल सिंह ने परमिंदर सिंह झोटा की प्रतिमा बनाई।

  2. प्रतिमा नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने का माध्यम है।

  3. युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया।

राजकुमार राजू, मोगा। मानसा में नशे के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए अपनी जान गंवाने वाले परमिंदर सिंह झोटा को श्रद्धांजलि देने के लिए मोगा जिले के गांव मानूके गिल निवासी किसान परिवार से संबंधित इकबाल सिंह ने उनका स्टेच्यू तैयार किया है।

इस प्रतिमा को बनाने में उन्हें करीब 72 घंटे का समय लगा, जबकि इसे तैयार करने पर लगभग 50 से 60 हजार रुपये खर्च हुए हैं। इकबाल सिंह ने प्रतिमा के माध्यम से न केवल परविदर सिंह झोटा को श्रद्धांजलि दी है, बल्कि युवा पीढ़ी को नशे से दूर रहने का संदेश देने का प्रयास भी किया है।

उन्होंने बताया कि इस स्टैचू को अपनी आर्ट गैलरी में लगाएंगे। इकबाल सिंह ने बताया कि वह समय-समय पर विभिन्न शख्सियतों के स्टेच्यू तैयार करते रहे हैं।

पूर्व PM डॉ. मनमोहन सिंह सहित कई हस्तियों की बना चुके हैं प्रतिमाएं

इससे पहले वह बॉलीवुड अभिनेता धर्मेंद्र और पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह सहित अन्य प्रमुख हस्तियों की प्रतिमाएं भी बना चुके हैं। इस बार उन्होंने परमिंदर सिंह झोटा की प्रतिमा तैयार करने का निर्णय लिया, ताकि नशे के खिलाफ उनकी लड़ाई और उनके योगदान को याद किया जा सके।

उन्होंने बताया कि परविदर सिंह झोटा की प्रतिमा तैयार करने के लिए उन्होंने लगातार मेहनत की। करीब तीन दिन की मेहनत और हजारों रुपये खर्च करने के बाद स्टेच्यू तैयार हुआ। उनके अनुसार, यह केवल एक प्रतिमा नहीं, बल्कि उस व्यक्ति के प्रति सम्मान व्यक्त करने का माध्यम है, जिसने नशे के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपनी जान गंवाई।

युवाओं को नशे की दलदल से बचाने का प्रयास

इकबाल सिंह ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से परमिंदर सिंह झोटा को शहीद का दर्जा दिए जाने के बाद उनके मन में भी उन्हें अपने तरीके से श्रद्धांजलि देने की इच्छा हुई। इसी सोच के तहत उन्होंने उनका स्टेच्यू तैयार किया। उनका मानना है कि नशे की समस्या से जूझ रहे पंजाब में युवाओं को सही दिशा दिखाना समय की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को नशे से दूर रहकर अपने भविष्य और परिवार के प्रति जिम्मेदारी समझनी चाहिए। परविदर सिंह झोटा की जिंदगी और नशे के खिलाफ उनके संघर्ष को याद करके युवाओं को समाज की बेहतरी के लिए आगे आने की प्रेरणा मिल सकती है।

इकबाल सिंह के अनुसार, उनका उद्देश्य प्रतिमा बनाकर केवल श्रद्धांजलि देना नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता पैदा करना भी है। वह चाहते हैं कि उनकी यह पहल लोगों को नशे के खिलाफ आवाज उठाने और युवाओं को इस बुराई से बचाने के लिए प्रेरित करे।