सत्येन ओझा.मोगा

बिल्डिंग ब्रांच के अधिकारियों को फील्ड में काम करने के कारण हाजिरी में छूट दी गई है, लेकिन फील्ड में वे कितने सक्रिय हैं, इसकी दो ताजा उदाहरणों ने बिल्डिंग ब्रांच की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है। बिना नक्शा मंजूरी के बनी एक इमारत की शिकायत मार्च 2018 में की गई। निगम ने बिल्डिंग बनने के बाद नोटिस पांच फरवरी 2021 को सात दिन का जारी किया। नोटिस की अवधि निकलने के बाद ब्रांच के अधिकारी फिर सो गए।

वहीं स्टेडियम रोड पर एक व्यक्ति ने पुराना मकान खरीदकर उसे ध्वस्त कर वहां बिना सीएलयू (चेंज आफ लैंड) कराए पूरी मार्केट खड़ी कर दी। मामला निगम कमिश्नर अनीता दर्शी के संज्ञान में आने के बाद उन्होंने बिल्डिंग ब्रांच के अधिकारियों को वीरवार की सुबह ही मौके की पड़ताल कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए, लेकिन शाम तक कोई अधिकारी जांच के लिए पहुंचा ही नहीं। सूत्रों का कहना है कि इमारत अधिकारियों की सेटिग से ही बन रही है, यही वजह है कि वे जांच के लिए मौके पर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। केस-नंबर 1

अकालसर रोड पर मट्टावाला बेहड़ा में एक प्रभावशाली व्यक्ति ने एक मंजिला आवास के नक्शे की मंजूरी के निगम में आवेदन किया था। आवेदन करने के बाद बेसमेंट सहित चार मंजिली कामर्शियल बिल्डिंग खड़ी कर दीं। नक्शा रिहायशी इमारत का भी मंजूर नहीं है। कामर्शियल बिल्डिंग का निर्माण शुरू होने के बाद से ही इस मामले में नगर निगम में 24 अगस्त 2018 को लिखित शिकायत की गई। पौने तीन साल बाद निगमकी बिल्डिंग ब्रांच की नींद खुली। पांच फरवरी 2021 को इमारत बनवाने वाले को सात दिन का नोटिस जारी करते हुए चेतावनी दी थी कि जबाव न मिलने पर निगम कार्रवाई करेगा। नोटिस में ये भी लिखा है कि जिस प्रकार से बिल्डिग में डेढ़ फुट का प्रोजेक्शन बाहर निकालकर तीन मंजिल तक किया गया है, उसमें निगम राजीनामा फीस भी वसूल नहीं कर सकता है। नियमानुसार इमारत ध्वस्त ही होगी। लेकिन नोटिस जारी करने के बाद बिल्डिग ब्रांच के अधिकारी फिर सो गए, बिल्डिंग बनकर तैयार हो गई। केस- नंबर 2

गिल पैलेस के निकट स्टेडियम रोड पर एक अन्य प्रभावशाली व्यक्ति ने पुराना मकान खरीदकर उसे ध्वस्त कर दिया। बाद में बिना सीएलयू व नक्शा पास कराए वहां पर पूरी मार्केट खड़ी कर दी। निर्माण कार्य अभी चल रहा है। ये मामला निगम कमिश्नर अनीता दर्शी के संज्ञान में आने के बाद उन्होंने वीरवार सुबह ही बिल्डिंग ब्रांच के अधिकारियों को मौके की पड़ताल के आदेश दे दिए थे लेकिन बिल्डिग ब्रांच का कोई भी अधिकारी जांच करने के लिए पहुंचा ही नहीं। सूत्रों का कहना है कि बिल्डिंग ब्रांच के अधिकारियों को इस इमारत की पहले से ही जानकारी थी। उन्हीं की सहमति से सेटिग के बाद बिल्डिंग बन रही है, ऐसे में मौके की जांच को गए तो दांव उल्टा पड़ सकता है, इसलिए गए ही नहीं। ये है जमीनी हकीकत

मकान का नक्शा पास करने के लिए अधिकतम एक महीने की अवधि होती है। इस अवधि में निगम को नक्शा बनाकर देना होता है, लेकिन निगम की बिल्डिंग ब्रांच में करीब एक हजार नक्शे इस समय फंसे पड़े हैं, जिनमें कुछ नक्शे तो आवेदन के दो साल से फंसे हुए हैं। जहां सेटिग हो जाती है, वहां बिना नक्शे के ही बिल्डिग बन जाती है, जांच के लिए कोई जाता ही नहीं है। शहर में ऐसी करीब ढाई सौ से ज्यादा अवैध बिल्डिंग बनी हुई हैं।

दोषी के खिलाफ कार्रवाई होगी : निगम कमिश्नर

निगम कमिश्नर अनीता दर्शी का कहना है कि इन मामलों में बिल्डिंग ब्रांच के अधिकारियों को मौके पर जाकर जांच करने के निर्देश दे दिए हैं। रिपोर्ट में जो भी जांच में दोषी पाया जाएगा, कानून अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

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