अश्विनी शर्मा, मोगा

देशभर में लॉकडाऊन के चलते जहां आमजन जीवन प्रभावित हुआ है, वहीं मृतकों के अस्थि प्रवाह करने न जा पाने के कारण भी उनके परिजनों को अस्थियां शमशान घाट के अस्थिगृह में ही रखनी पड़ रही हैं। अस्थि प्रवाह के लिए परिजन लॉकडाउन खुलने का कर रहे हैं इंतजार।

शहर में मुख्य दो शमशान घाट हैं जहां पर अधिकत्तर मृतकों के शव के संस्कार किए जाते हैं। इसमें गांधी रोड स्थित स्वर्ग आश्रम व कैंप स्थित स्वर्ग आश्रम शामिल है। इसके अलावा शहर में चार अन्य शमशान घाट है जहां पर वहां के नजदीकी क्षेत्र से मृतकों के शवों का संस्कार किया जाता है।

20 मार्च से अब तक शवों के संस्कार के बाद निर्धारित स्थानों पर अस्थियों के प्रवाह न होने के कारण अस्थियों को शमशान भूमि में बने अस्थि गृह में ताले के भीतर रखा गया है। दीपक शर्मा ने बताया कि गांधी रोड स्थित श्मशानघाट के अस्थि गृह में 30 अस्थि कलश रखा गया है। मनोहर ने बताया कि कैंप शमशान घाट में 10 अस्थियां रखी गई और बाकी 18 शहर के अन्य शमशान भूमि के अस्थी गृह में रखी गई है। गांधी रोड स्थित शमशान घाट में 20 अस्थियों के रखने के लिए बैरक बनाए है, लेकिन 10 अस्थियों को नीचे जमीन पर रखकर बाहर से कमरे को ताला लगा दिया गया है।

लॉकडाऊन के चलते शवों की अस्थियों को अस्थी गृह के भीतर रखकर ताले लगा दिए गए है। अन्यथा संस्कार के बाद इन अस्थियों को शहर से 340 किलोमीटर दूर हरिद्वार, 175 किलोमीटर दूर कीर्तपुर साहिब, 45 किलोमीटर दूर हरि के पतन, 35 किलोमीटर दूर फिरोजपुर नहर व जिले में से गुजरने वाले सतलुज दरिया में प्रवाहित किया जाता रहा है।

दो दिन पहले अपने ससुर किरण मित्तल की मृत्यु के बारे तरूण ने बताया कि उन्होनें संस्कार तो कर दिया है, लेकिन वें अस्थी प्रवाह को लेकर हरिद्वार जाते है लेकिन लॉकडाऊन के कारण वें वहां नहीं जा पाए तथा अस्थी को गांधी रोड स्थित शमशान घाट के अस्थी घर में रख दिया है। वहीं अरविद कुमार ने भी यही कारण बताते हुए कहा कि उसने भी अपनी माता फुल्ला देवी के संस्कार के बाद अस्थियों को इसी स्थान पर रखवा दिया है।

Posted By: Jagran

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