सत्येन ओझा.मोगा

गणपति महोत्सव के बढ़ते क्रेज के दौर में विसर्जन के नाम पर दरियाओं के प्रदूषण की बातें भी उठने लगी हैं। इसके खिलाफ पिछले 11 सालों से शहर के प्रमुख मिष्ठान व्यवसायी एवं लेखक जगदीश कंबोज लौकी एवं कद्दू (पेठा) से ईको फ्रेंडली भगवान गणपति की प्रतिमा बनाकर उसे पूजन के बाद विसर्जित करते हैं।

83 साल की उम्र में इस बार भी पांच दिन तक गणपति पूजन करने के बाद उन्होंने सतलुज दरिया में उसका विसर्जन कर दिया। जगदीश कंबोज बताते हैं कि गणपति विसर्जन या अन्य कारणों से नदियां एवं अन्य जल स्त्रोत प्रदूषित हो रहे हैं उसी को लेकर वे लोगों को संदेश देना चाहते हैं कि वे अपनी धार्मिक मान्यताओं परंपराओं को जीवित को रखें लेकिन परंपराओं के नाम पर प्राकृतिक संशाधनों को प्रदूषित न करें, इसी संदेश के साथ वे लगातार 11 सालों से अपने प्रयासों में जुटे हुए हैं। पाक से आने वालों को खिलाते थे खाना

शहर के दिल कहे जाने वाले न्यू टाउन में मार्डन स्वीट्स के नाम से मिठाई की दुकान चलाने वाले ये वही जगदीश कंबोज हैं, जो साल 1947 में भारत बंटवारे के दौरान थे तो मात्र 10-12 साल के लेकर दोपहर को करीब साढ़े तीन बजे के करीब पाकिस्तान से आने वाले हिदुओं से भरी गाड़ी मोगा स्टेशन से गुजरती थी तो गाड़ियों में सवार लोगों को अपने दूसरे साथियों के साथ उन्हें भोजन कराने पहुंच जाते थे। हाल ही में उन्होंने 1947 की विभीषिका के साथ मोगा के विकास की कहानी पर आधारित एक पुस्तक 'मोगा' के नाम से लिखी है।

सादगी से कोरोना को दी मात

जगदीश कंबोज इस उम्र में भी युवाओं से ज्यादा भागदौड़ करते हैं। व्यवसाय के साथ ही आज भी साहित्य लेखन कर रहे हैं, अपने इस जीवन कौशल की वजह बताते हुए जगदीश कंबोज बताते हैं कि वे सादगी में विश्वास करते हैं,पूरा जीवन सादगी से बिताया है। कोरोना काल में भी वे लगातार सक्रिय रहे, उस समय सुबह, शाम, दोपहर तीन समय अपनी नाम में तीन समय सरसों का तेल डालते थे, उनके इस फार्मूला ने उन्हें कोरोना संक्रमण से बचाए रखा। शरीर में नियमित रूप से सरसों की तेल की मालिश करते हैं। सादा भोजन लेते हैं। सूर्योदय से पहले सुबह जागते हैं, रात को जल्दी सोते हैं। यही वजह है कि आज तक वे पूरी तरह निरोगी हैं, उन्हें कभी किसी भी प्रकार की दवा लेने की जरूरत नहीं पड़ी।

परव और जाह्नवी ने भी बनाए ईको फ्रेंडली श्री गणेश

अकेले जगदीश कंबोज ही नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के हस्ताक्षर जवाहर नगर निवासी दो भाई बहनों सातवीं कक्षा की छात्रा जाह्नवी वं केजी के विद्यार्ती परव बंसल ने केले के पत्तों से ईको फ्रैंडली गणपति बनाकर भगवान गणपति बनाकर लोगों को जलाशयों को प्रदूषण से बचाने का संदेश दिया है। दोनों भाई बहन अपने हाथों से बनाए गणपति का हर दिन पूजन भी करते हैं। दोनों भाई बहन जवाहर नगर के अध्यापक दंपती रविदर कुमार बंसल व नीलम बंसल के बेटा बेटी हैं, इससे पहले अपने पूरे हर में पौधे लगाकर स्वतंत्रता दिवस समारोह पर सम्मानित भी हो चुके हैं।

Edited By: Jagran