सत्येन ओझा, मोगा : केंद्र सरकार की योजना के तहत सूबे में साल 2016 में शुरू किए गए 204 क्रैच सूबे में सत्ता बदलते ही लगभग बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं। कैप्टन सरकार पिछले तीन सालों में क्रैच में काम करने वाली आंगनवाड़ी वर्करों को महज चार महीने का ही वेतन दे सकी है, लेकिन क्रैच में आने वाले बच्चों के मुंह का निवाला तो पूरी तरह छिन चुका है। मोगा में इन क्रैच की संख्या पांच हैं। क्रैच में बच्चों को उपलब्ध कराए जाने वाले खिलौने व अन्य साधनों की सप्लाई भी पिछले तीन सालों से नहीं हो रही है। क्रैच में काम करने वाली आंगनबाड़ी वर्करों में सरकार की इनदेखी को लेकर आक्रोश का माहौल है।

केंद्र सरकार ने सरकारी विभागों में महिलाओं को रोजगार के प्रति उत्साहित करने के लिए साल 2015 में क्रैच की व्यवस्था लागू की थी, जो पंजाब में साल 2016 में लागू कर दी गई थी। क्रैच में सरकारी विभागों में जॉब करने वाली महिलाओं के बच्चों की देखभाल के लिए आंगनवाड़ी वर्करों की ड्यूटी लगाई गई थी। मोगा में ये क्रैच गोधेवाला छप्पड़, घल्लकलां, लंडेके, बाघापुराना व निहालसिंह वाला तहसील में चल रहे हैं। क्रैच में काम करने वाली आंगनवाड़ी वर्करों को तीन हजार व सहायक को 1500 रुपये सरकार की ओर से मानदेय दिया जाता है। तीन साल पहले तक ये क्रैच रेडक्रॉस की मदद से चलाए जा रहे थे। तब तक यहां बच्चों को खिलौने भी आ रहे थे। आंगनबाड़ी वर्करों व सहायकों को मानदेय भी मिल रहा था, लेकिन एक जनवरी 2017 से ये व्यवस्था रेडक्रॉस से छीनकर महिला एवं बाल विकास विभाग में दे दी गई है, तब से बच्चों के लिए आने वाला भोजन, खिलौने तो बंद हुए ही साथ ही आंगनवाड़ी वर्करों को मिलने वाला वेतन भी नहीं मिल रहा है।

मोगा में काम करने वाली आंगनबाड़ी वर्कर मनीषा शर्मा, ऊषा, अवतार कौर, जसवीर कौर, रंजीत कौर, सुखदीप कौर, हरदीप कौर, बलजिदर कौर ने बताया कि तीन साल में उन्हें सिर्फ चार महीने का मानदेय मिल रहा है, जबकि वे नियमित रूप से क्रैच की ड्यूटी पर पहुंच रही हैं, क्रैच में बच्चे भी काफी संख्या में आ रहे हैं।

कई बार लिखा विभाग को : गुरचरण सिंह

जिला प्रोग्राम अधिकारी गुरुचरण सिंह ने बताया कि इस मामले में कई बार बाल एवं महिला कल्याण विभाग को लिख चुके हैं। विभाग से जारी होते ही मानदेय का भुगतान कर दिया जाएगा।

Posted By: Jagran

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